जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश के विरोध में शनिवार से कैंपस के गेट पर शुरू हुआ विद्यार्थियों का बेमियादी धरना दूसरे दिन रविवार की छुट्टी में भी जारी रहा। इस दौरान कई दफा हुई तेज बारिश भी आंदोलनकारियों को नहीं डिगा सकी। इसके चलते आंदोलनकारियों के इर्दगिर्द मुस्तैद किए गए पुलिसकर्मियों को भी बारिश में भीगना पड़ा।
दूसरे दिन के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद थीं, जिनकी जुबां पर सेव यूनिवर्सिटी और सेव एजुकेशन के नारे थे। विद्यार्थी इन्हीं नारों के प्लेकार्ड हाथों में थामे हुए थे। धरने पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के फैसले का विरोध करते हुए अपने भविष्य को सुरक्षित रखने की मांग की।
उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई के सपनों का केंद्र है। यहां तमाम जगहों से आकर छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उनका कहना था कि भवनों के ध्वस्तीकरण से सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों का होगा। वर्षों की मेहनत और अभिभावकों की उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा।
