बायोमेट्रिक हाजिरी, मानदेय वृद्धि सहित 14 सूत्रीय मांगो को लेकर आंदोलित पंचायत सहायकों के कार्य बहिष्कार से ग्राम सचिवालयों पर ताले लटक गए हैं। आय, जाति, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर पेंशन आवेदन तक बंद हैं। इससे ग्रामीणों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में 690 ग्राम पंचायतों में सचिवालय बने हुए हैं, जिन्हें डिजिटल बनाया जा रहा है। इसकी अहम कड़ी माने जाने वाले पंचायत सहायकों के आंदोलन की राह पकड़ने से ग्रामीण इलाकों में कामकाज दो दिन से ठप पड़ा है। अल्प मानदेय और संसाधनों के अभाव में काम कर रहे सहायक अपनी मांगों को लेकर आंदोलित हैं। मानदेय वृद्धि, स्थायीकरण और स्पष्ट सेवा नियमावली लागू करने जैसी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन उत्तर प्रदेश ने सोमवार को विकास भवन में जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से निदेशक, पंचायती राज के नाम ज्ञापन सौंपा है।
ठप पड़े काम, ग्रामीण हो रहे परेशान
पंचायत सहायकों के कार्य बहिष्कार और असंतोष का सीधा असर ग्राम पंचायत सचिवालयों के संचालन पर पड़ रहा है। प्रदेश अध्यक्ष बृजेश कुमार मिश्रा ने बताया कि गांवों में जन्म-मृत्यु पंजीकरण, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल और विभिन्न पेंशन योजनाओं के ऑनलाइन आवेदन जैसे महत्वपूर्ण काम अटक गए हैं। प्रदेश मंत्री शिवानी गिरी का कहना है कि वे विभागीय योजनाओं का सारा बोझ उठाते हैं, इसके बावजूद उनके भविष्य की कोई सुरक्षा नहीं है। इस संबंध में पंचायत राज अधिकारी मनीष कुमार का कहना है कि सहायकों की मांगो के संबंध में शासन स्तर पर अवगत करा दिया है।
सहायकों की प्रमुख मांगें:
– वर्तमान 6000 प्रतिमाह के अल्प मानदेय को बढ़ाकर ग्राम पंचायत सचिव के समकक्ष 30,000 किया जाए या न्यूनतम कुशल मजदूरी लागू हो।
– अनुबंध आधारित व्यवस्था समाप्त कर पंचायत सहायकों की स्थायी और स्पष्ट सेवा नियमावली बनाई जाए।
– ग्राम विकास अधिकारी/ग्राम पंचायत अधिकारी की भर्तियों में पंचायत सहायकों को 50% क्षैतिज आरक्षण मिले।
– विवाहोपरांत महिला पंचायत सहायकों के स्थानांतरण/समायोजन हेतु स्पष्ट नीति बने।
– इंटरनेट, प्रिंटिंग, स्टेशनरी का प्रतिमाह अलग बजट और विभागीय मोबाइल व आईडी कार्ड उपलब्ध कराए जाएं।
– पंचायत सहायकों से लिए जा रहे गैर-विभागीय कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
