पापा…मुझे माफ करना, मैं सफल नहीं हो पाया। मैं भी भाई-बहन की तरह सरकारी नौकरी करना चाहता था। नौकरी पाने के लिए 50 से ज्यादा प्रयास किए….यह वह भावनात्मक पंक्तियां हैं जिन्हें अंग्रेजी में लिखकर राज्यपाल से सम्मानित गोल्ड मेडलिस्ट आनंद ने गुरुवार दोपहर फंदा लगाकर जान दे दी।



सूचना पर पहुंची फॉरेंसिक और पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में ले लिया था। गुजैनी जे-ब्लाॅक निवासी राजकुमार गुप्ता ने बताया कि उनका बड़ा बेटा अमित और बेटी प्रिया बक्सर में सरकारी शिक्षक हैं। छोटा बेटा आनंद भी पढ़ने में काफी मेधावी था। उसने पूरे प्रदेश के विश्वविद्यालयों में तीसरा स्थान हासिल किया था।



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