झांसी। गृहकर बिल की खामियां दूर करने के लिए अगस्त से एजेंसी की टीम के सदस्य घर-घर दस्तक देंगे। एजेंसी चयन के लिए नगर निगम ने टेंडर निकाल दी है। अगर किसी भवन स्वामी ने आवासीय भवन को व्यावसायिक में तब्दील कर लिया है तो उसे नियमानुसार गृहकर का भुगतान करना पड़ेगा।
जीआईएस सर्वे के बाद नगर निगम के गृहकर के दायरे में करीब पौने दो लाख भवन आ गए हैं। इसमें आवासीय और व्यावसायिक भवन शामिल हैं। जीआईएस सर्वे के बाद से ही कई गुना तक गृहकर बढ़ जाने की शिकायतें नगर निगम के पास पहुंच रही हैं। कई बार अलग-अलग वार्डों में शिविर लगाकर नगर निगम प्रशासन गृहकर बिल संबंधी शिकायतों का निस्तारण भी करा चुका है। अब निगम प्रशासन एक एजेंसी को इन शिकायतों का निस्तारण की जिम्मेदारी देने जा रही है। जिस भी कंपनी को ये टेंडर मिलेगा, उसके कर्मचारी गृहकर के दायरे में आने वाले भवन स्वामियों के घर पहुंचें। बढ़े हुए गृहकर बिल की शिकायतों के संबंध में भवन की पैमाइश आदि करके पूरी रिपोर्ट नगर निगम प्रशासन को सौंपेंगे। फिर नियमानुसार गृहकर बिल पर निर्णय लिया जाएगा। दूसरी तरफ, यदि जीआईएस सर्वे के बाद किसी ने भवन स्वामी ने मकान के स्वरूप में बदलाव किया है। यानी कि आवासीय भवन में व्यावसायिक गतिविधि भी शुरू कर दी है तो भवन स्वामी को नियमानुसार गृहकर का भुगतान करना होगा। नगर आयुक्त आकांक्षा राणा का कहना है कि निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी अगस्त से यह काम शुरू कर देगी।
हर भवन का होगा क्यूआर कोड, स्कैन कर जमा कर सकेंगे गृहकर बिल
हर भवन का क्यूआर कोड तैयार किया जाएगा। इसमें गृहकर बिल से लेकर डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के यूजर चार्ज के बकाया तक का उल्लेख होगा। कोड को स्कैन करते ही पूरा ब्योरा सामने आ आएगा। फिर ऑनलाइन ही भुगतान की भी सुविधा रहेगी। इसके लिए नगर निगम एक निजी बैंक के साथ करार करने जा रही है। एजेंसी ही भवन स्वामियों को बार कोड उपलब्ध कराएगी।
