आगरा से कई राज्यों में नकली-सैंपल और सरकारी दवाओं की तस्करी की जा रही है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त ने इस सिंडिकेट का खुलासा किया है। इसमें माफिया बंद फर्म और निरस्त लाइसेंस से दवाओं का अवैध कारोबार कर रहे थे। अब ऐसे फर्म को चिह्नित किया जा रहा है, जो लंबे समय से बंद हैं।
जिले में दवाओं के आठ हजार दवा इकाइयों के लाइसेंस हैं। इनमें से करीब 3 हजार थोक दवा इकाइयों के लाइसेंस हैं। बीते दिनों एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने आगरा में नकली दवाओं के अलावा एक्सपायर, सरकारी और सैंपल दवाओं की रीलेवलिंग कर अवैध कारोबार को पकड़ा। इसमें 90 से अधिक फर्म पर कार्रवाई हुई, जिनमें से 58 के लाइसेंस निरस्त किए। इनमें कई फर्म बंद मिलीं, ये लंबे समय से नहीं खुलती थीं। इन फर्म की जांच की तो ये निरस्त लाइसेंस से दवाओं का अवैध कारोबार करते पकड़े। इनके अवैध गोदाम से 3.72 करोड़ रुपये की नामी कंपनियों के सैंपल और सरकारी दवाएं मिलीं। इनको सीज करते हुए गोदाम सील कर दिए। इसके बाद लंबे समय से बंद फर्म की जांच की जा रही है।
सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि अभी तक की जांच में कई ऐसे फर्म संचालक मिले, जो अपना ऑफिस और प्रतिष्ठान बंद रखते थे, लेकिन फर्म के नाम पर दवाओं का अवैध कारोबार करते थे। इसके बाद ऐसे फर्म को चिह्नित किया जा रहा है, जिसके बाद जांच की जाएगी कि ये वाकई में बंद हैं या फिर अवैध कारोबार में संलिप्त हैं।
बोर्ड पर ये जानकारी दर्ज करना अनिवार्य
सहायक आयुक्त औषधि ने बताया कि प्रतिष्ठान और उसके गोदाम पर फर्म की पूरी जानकारी दर्ज करनी होगी। इसमें फर्म का नाम, लाइसेंस नंबर, लाइसेंसधारक का नाम, जीएसटी नंबर, फोन नंबर समेत अन्य जानकारी शामिल हैं। इससे मेडिकल फर्म बंद मिलने पर इस विवरण से आगे की जानकारी की जा सके। आगरा फार्मा एसोसिएशन के मीडिया समन्वयक पुनीत कालरा ने बताया कि सभी दवा व्यापारियों को ये जानकारी बोर्ड पर दर्ज करने के लिए निर्देशित कर दिया गया है।
