बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) बड़ा बाइपास के निकट ग्रेटर बरेली में दो एकड़ भूमि पर यूरोप की तर्ज पर बॉक्स विलेज बसाएगा। इसमें होटल, क्लब, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मैरिज हॉल और स्वीमिंग पूल की सुविधा मिलेगी। शहरवासियों को यहां ड्राइव इन सिनेमा का लुत्फ उठाने का भी मौका मिलेगा। खुले आसमान के नीचे कार में बैठे-बैठे आप फिल्म देख सकेंगे।


इस सपने को आकार देने के लिए बीडीए की ओर से भूमि पूजन के बाद काम शुरू कराया जा चुका है। दिल्ली की एजेंसी को निर्माण की जिम्मेदारी दी गई है। शिपिंग कंटेनरों को भवन का रूप देकर इसे तैयार किया जाएगा। इस पर करीब 17 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसे पीपीपी मॉडल के तहत संचालित किया जाएगा। यानी निर्माण के बाद इसके संचालन की जिम्मेदारी निजी एजेंसी को दी जाएगी। इस एजेंसी के चयन के लिए जल्द प्रक्रिया शुरू होगी।

बॉक्स विलेज को अलग-अलग सुविधाओं के अनुसार ए से जे तक 10 सेक्टरों में बांटा गया है। जे सेक्टर सबसे बड़ा होगा। इसमें 3557.47 वर्गमीटर क्षेत्रफल में ड्राइव इन सिनेमा की सुविधा मिलेगी। 50 कमरों के होटल में रहने-खाने की सुविधा मिलेगी। यह अनोखा विलेज 24 घंटे खुला रहेगा। यानी लखनऊ-दिल्ली हाईवे से गुजरने वाले यात्री किसी भी समय यहां उपलब्ध सुविधाओं का आनंद ले सकेंगे। विलेज में दो तरफ पार्किंग की सुविधा भी होगी। 

अमेरिका से शुरू होकर यूरोप तक फैला कंटेनर सिटी का कॉन्सेप्ट

कंटेनर सिटी अमेरिका से प्रचलित हुई। वहां 1990 के दशक में बेकार हो चुके कार्गो कंटेनरों को रहने के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया गया। शिपिंग कंटेनर वास्तुकला की जड़ें 20वीं सदी के मध्य की बताई जाती हैं, लेकिन इसका पहला प्रमुख उपयोग वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना द्वारा कंटेनरों को बैरक के रूप में बदलने से शुरू हुआ। 



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