यूनेस्को की विश्व धरोहर में शुमार ताजमहल में पर्यटकों की भारी भीड़ से हो रहे नुकसान को देखते हुए सैलानियों की संख्या तय की जाएगी। हर दिन, हर घंटे ताजमहल में कितने सैलानी एक साथ रहें, इसका निर्धारण इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) दिल्ली के विशेषज्ञ करेंगे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने विजन डॉक्यूमेंट मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आईआईटी दिल्ली से सर्वे कराने का फैसला किया है। कुछ ही दिनों में आईआईटी के विशेषज्ञ ताजमहल का दौरा करके कैरिंग कैपेसिटी तय करने के लिए अध्ययन शुरू कर देंगे।
ताजमहल में हर दिन 25 से 30 हजार सैलानी पहुंचते हैं, जबकि शनिवार-रविवार या अवकाश के दिनों में इनकी संख्या 50 हजार से ज्यादा पहुंच जाती है। इनमें 15 वर्ष तक की उम्र वाले पर्यटकों का प्रवेश निशुल्क होने के कारण यह संख्या और ज्यादा हो जाती है। 394 साल पहले बनाए गए ताजमहल में सैलानियों की संख्या तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने विजन डॉक्यूमेंट वाले मामले में एएसआई को निर्देश दिए थे। हालांकि, राष्ट्रीय पर्यावरणीय अभियांत्रिकी शोध संस्थान (नीरी) 11 साल पहले वर्ष 2015 में भीड़ प्रबंधन अैर कैरिंग कैपेसिटी (वहन क्षमता) के लिए रिपोर्ट दे चुका है, लेकिन अब सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) की सिफारिश के बाद फिर से आईआईटी दिल्ली से अध्ययन कराया जाएगा।