इस बार वट सावित्री व्रत शनिवार को शनैश्चर अमावस्या के दुर्लभ संयोग में मनाया जाएगा। इसे ज्योतिष व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है। इस दिन पति की दीर्घयु, परिवार की सुख-समृद्धि और संतान सुख प्राप्ति के लिए महिलाएं व्रत रख कर बरगद के पेड़ की पूजा करेंगी।

ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला वट सावित्री व्रत सभी सौभाग्यवती महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत पूरे देश में महिलाएं श्रद्धा व निष्ठा के साथ करती हैं। उत्तर भारत में इसे बरगदाही के नाम से जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5:11 बजे से शुरू हो रही है और 16/17 मई की रात 01:30 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार 16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या मान्य होगी और उसी दिन वट सावित्री व्रत मनाया जाएगा। वट सावित्री पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 07:05 से दोपहर 01:40 बजे तक रहेगा।

पांच शुभ संयोग बन रहे

ज्योतिषाचार्य पं. पीएन द्विवेदी के अनुसार इस बार शनि अमावस्या पर एक साथ पांच शुभ संयोग बन रहे हैं, ज्येष्ठ अमावस्या, शनि जयंती, वट सावित्री व्रत, सौभाग्य और शोभन योग बन रहा है। सुबह से 10:26 बजे तक सौभाग्य योग रहेगा, जो जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ाने वाला माना जाता है। इसके बाद शोभन योग प्रारंभ होगा जो शुभ कार्यों के लिए उत्तम समय प्रदान करेगा। ये सभी योग मिलकर इस दिन को अत्यंत फलदायी बना रहे हैं।

शीतलता, शुद्धता प्रदान करता है वट वृक्ष

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष की पूजा और व्रत करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। वट वृक्ष वातावरण को शीतलता व शुद्धता प्रदान करता है। यह आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है।



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