समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए विभिन्न मुद्दों पर फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ा रही है। इसी के तहत सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने सभी कार्यकर्ताओं, प्रवक्ताओं और पदाधिकारियों को नसीहत दी है कि वे जाति और धर्म से जुड़े विवादित मुद्दों पर पूरी तरह से चुप्पी साध लें।
सपा नेतृत्व का स्पष्ट मानना है कि भाजपा बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मुद्दों को हवा देती है, इसलिए सपाइयों को उनके इस नैरेटिव (एजेंडे) के जाल में फंसने से बचना होगा। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, सपा ने अधिक से अधिक नए मतदाताओं को पार्टी के साथ जोड़ने की रणनीति बनाई है। इसी के तहत धर्म और जाति के विवादित मुद्दों से दूर रहने के लिए कहा गया।
इससे किसी न किसी वर्ग के नाराज होकर दूर छिटकने की पूरी आशंकता रहती है। सपा के एक नेता ने नाम न छापने के अनुरोध के साथ बताया कि पार्टी विकास, रोजगार और सामाजिक न्याय के बड़े कैनवास पर सभी वर्गों को साथ लाना चाहती है।
सपा का मानना है कि हमारा मुकाबला जनता की समस्याओं को दबाने वाली राजनीति से है। महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की दुर्दशा और आउटसोर्सिंग में युवाओं का शोषण असली मुद्दे हैं। जाति-धर्म के विवादों पर टीका-टिप्पणी करके भाजपा की पिच पर खेलने की आवश्यकता नहीं है।
इसलिए नेतृत्व ने सभी को विवादित विषयों पर नो-कमेंट कहकर आगे बढ़ जाने के निर्देश दिए हैं। सपा नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं को हिदायत दी है कि वे जनता के बीच जाएं और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समेत सभी वर्गों की हकमारी के खिलाफ सकारात्मक अभियान चलाएं, न कि किसी धार्मिक या जातीय विवाद को हवा देकर विरोधियों के एजेंडे को मजबूत करें।
