उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन में एक बार फिर मनमानी पकड़ी गई है। यहां कंपनी की दवा घटिया मिलने पर धरोहर राशि के रूप में फर्जी चेक की पड़ताल हुई। यह चेक भी फर्जी निकला है। अब कंपनी पर रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ ही उसे पांच साल के लिए ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है।
सप्लाई कॉर्पोरेशन में मध्य प्रदेश के उज्जैन की कंपनी बोकेम हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड ने वर्ष 2021 से 24 तक अलग- अलग दवाओं की आपूर्ति की। कॉर्पोरेशन ने इन दवाओं की जांच कराई तो कई बैच की दवाओं की गुणवत्ता खराब मिली। इसमें ज्यादातर दवाएं मौसमी बीमारियों में प्रयोग होने वाली थीं।
दवाओं की खपत रोक दी गई
कंपनी की आपूर्ति रोक दी गई। अस्पतालों से संबंधित बैच की दवाओं की खपत रोक दी गई है। कंपनी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई। कंपनी को नोटिस जारी किया गया। जवाब न मिलने पर उसकी धरोहर राशि जब्त करने की कार्रवाई शुरू की।
इस दौरान पता चला कि कंपनी की ओर से धरोहर राशि के रूप में जमा 1.91 करोड़ के चेक जाली हैं। कॉर्पोरेशन ने सुशांत गोल्फ सिटी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक डा. उज्जवल कुमार ने कंपनी को उत्तर प्रदेश में पांच वर्ष के लिए ब्लैक लिस्टेट कर दिया है। अब यह कंपनी उत्तर प्रदेश में पांच साल तक किसी भी टेंडर में हिस्सा नहीं ले पाएगी।
ब्लैक लिस्टेट होने के बाद खुलती है पोल
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन ने दवाएं भेजी जाती हैं। जब कंपनी की दवा घटिया निकली और उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई तब पता चला कि चेक जाली हैं। इससे पहले भी इस तरह के घटनाक्रम हो चुके हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिस वक्त धरोहर राशि के रूप में चेक लिए जाते हैं, उस वक्त उनकी पहचान क्यों नहीं कराई जाती हैं।
जानकारों का कहना है कि जिस तरह से एक के बाद एक मामले सामने आ रहे हैं, उससे यह साबित होता है कि कंपनियां जानबूझ कर घटिया दवाएं सप्लाई करती हैं। मालूम हो कि पिछले दिनों आगरा में एफएसडीए की जांच में भी निजी गोदाम में मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन की दवाएं पकड़ी जा चुकी हैं।
