जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कन्या भ्रूण परीक्षण व हत्या के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए जिले के सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे और बायोमेट्रिक मशीन लगाना अनिवार्य कर दिया है। मंगलवार को जिला सलाहकार समिति की बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि पीसीपीएनडीटी एक्ट का कड़ाई से पालन किया जाए।

डीएम ने कहा नियमों की अनदेखी या भ्रूण हत्या की शिकायत पुष्ट होने पर संबंधित अस्पताल व केंद्र संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। समीक्षा बैठक में घटते लिंगानुपात और कन्या भ्रूण हत्या रोकने के उपायों पर मंथन हुआ। इसके लिए सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर रिकॉर्ड का सही रखरखाव बेहद जरूरी है। रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की कमी या गड़बड़ी दंडनीय अपराध मानी जाएगी। बैठक में निर्णय लिया गया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा अल्ट्रासाउंड केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों की नियमित और आकस्मिक जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा।

मशीनों की खरीद-बिक्री पर होगा भौतिक सत्यापन

डीएम ने निर्देश दिए कि अल्ट्रासाउंड मशीन के क्रय-विक्रय पर उसका भौतिक सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए। पीसीपीएनडीटी एक्ट के नियम-13 के तहत किसी भी केंद्र से डॉक्टर का नाम हटाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि उस मशीन पर किसी अन्य डॉक्टर की उपलब्धता है या नहीं। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि एक डॉक्टर अधिकतम किन्हीं दो केंद्रों पर ही खुद को पंजीकृत कर सकता है। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।

 



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