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आगरा के गढ़ी भदाैरिया में संचालित हो रही फैक्टरी को संचालक ने मौत का सामान बना रखा था। इसमें जिंदगी की अनदेखी की जा रही थी। कोठी में दिखाने के लिए आगे की तरफ काॅस्मेटिक की दुकान बनाई गई थी। पीछे की तरफ कोठी के अंदर ही बेसमेंट बना था। पहली और दूसरी मंजिल पर जूता बनाने काम था। इसमें परिवार भी रह रहा था। घटना के बाद माैके पर पहुंचे मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) यह हालात देख चाैंक गए। दमकलकर्मियों का कहना था कि रात में हादसा होता तो जान बचाना मुश्किल हो जाता।
सीएफओ देवेंद्र सिंह ने बताया कि फैक्टरी चलाने के नियमों की अनदेखी की जा रही थी। आवासीय परिसर में संचालन हो रहा था। फायर एनओसी भी नहीं थी। फर्म के पंजीकरण के लिए मानकों का पालन नहीं किया गया। सुरक्षा के लिए सिर्फ एक छोटा फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) नजर आया। मुख्य दरवाजे से घुसते ही बने ऑफिस में लकड़ी और प्लास्टिक के फ्रेम लगे थे। आगे गैलरी में एक तरफ सीढ़ी तो दूसरी तरफ बेसमेंट बना था। जगह-जगह जूते, उसे बनाने का सामान रखा मिला।
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आगरा आग हादसा
– फोटो : अमर उजाला
पहली मंजिल पर जाने की सीढ़ी 3 फीट से भी कम चाैड़ी थी। जूता बनाने के लिए चमड़ा, फोम और केमिकल का प्रयोग होता है। आग केमिकल में लगने की वजह से ही ज्यादा भड़की थी। धुआं भी अधिक था। आग रात में लगती तो लोग फंस सकते थे। धुएं में परिवार का निकलना भी मुश्किल हो जाता। फैक्टरी संचालक को नोटिस देंगे, उससे जवाब लेने के बाद कार्रवाई होगी।
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आगरा आग हादसा
– फोटो : अमर उजाला
धुएं से बेहाल हुए काॅलोनीवासी, बोले-घर-घर में अवैध कारखाने
आगरा के गढ़ी भदाैरिया में संरक्षित स्मारक ढाकरी का महल है। जिस फैक्टरी में आग लगी, उससे स्मारक 100 मीटर की दूरी पर है। धुआं आसपास के घरों में पहुंचने लगा, लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों को हुई। वह घरों से बाहर निकल आए। कई लोग अपने एलपीजी सिलिंडर भी निकाल लिए। लोगों का कहना था कि इलाके में 1 दर्जन से अधिक जूता कारखाने और गोदाम अवैध तरीके से चल रहे हैं। अधिकारी ध्यान नहीं देते।
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आगरा आग हादसा
– फोटो : अमर उजाला
फैक्टरी के पड़ोस में रहने वाले जल निगम से सेवानिवृत्त जूनियर इंजीनियर राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि शोर सुनकर बाहर आए तो फैक्टरी से धुआं निकल रहा था। उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने पर घर के अंदर आ गए लेकिन घर में भी धुआं भर गया। इस पर पत्नी लता, बेटे अंकित, बहू शालिनी, दो बच्चों के साथ बाहर निकल आए। गैस सिलिंडर भी निकाल लाए। क्षेत्र में कई घरों में जूता कारखाने और गोदाम संचालित हैं। अधिकारी देखने नहीं आते। वहीं घर के दरवाजे पर किसी तरह का काम कराने पर नगर निगम और एडीए के अधिकारी तुरंत पहुंचकर कार्रवाई कर देते हैं।
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आगरा आग हादसा
– फोटो : अमर उजाला
लग रहा था डर
फैक्टरी के पास ही तुषार गाैतम और गाैरव रहते हैं। उन्होंने बताया कि फैक्टरी में पहली मंजिल पर आग थी। इससे भूतल पर आग फैलने की आशंका थी। उनके घर पड़ोस में ही हैं। डर लग रहा था कि आग अंदर तक नहीं आए। मगर समय रहते दमकल ने आग पर काबू कर लिया। इससे बड़ी घटना बच गई।