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एएमयू के भूगोल विभाग की छत से मौसम का गुब्बारा छोड़ते डॉ. कौसर शमीम, डॉ. वसी अहमद जैदी
– फोटो : विवि
विस्तार
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने रविवार को 36वां मौसम गुब्बारा छाेड़ा, जो 28 किमी की ऊंचाई पर जाकर फूटा। फूटने के बाद यह गुब्बारा बरेली के मीरगंज में गिरा।
यूनिवर्सिटी के भूगोल विभाग की छत से रविवार सुबह 10:30 पर गुब्बारा छोड़ा गया। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सैयद कौसर शमीम ने बताया कि गुब्बारा छोड़ने के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल से अनुमति मांगी गई। अनुमति मिलने के बाद गुब्बारा छोड़ा गया। उच्चतम ऊंचाई पर आर्द्रता 11.24 फीसदी थी, जबकि जमीन पर 81 फीसदी आर्द्रता थी। उच्चतम ऊंचाई पर दबाव 30.3 एमबी था, जबकि जमीन पर 1016 एमबी था। उन्होंने कहा कि गुब्बारा और इसमें लगा उपकरण रेडियोसोंड बरेली के मीरगंज में गिरा। 11 जुलाई 2024 को पहला गुब्बारा छोड़ा गया था।
ऐसे मिलता है डेटा
समन्वयक व असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सैयद कौसर शमीम ने बताया कि मौसम गुब्बारे में करीब छह मीटर की रस्सी बंधी होती है। उसके अंतिम छोर पर रोडियोसोंड उपकरण बंधा होता है, जिसकी दाहिनी ओर लगे जीपीएस से लोकेशन की जानकारी मिलती। बायीं ओर सेंसर लगा होता है, जो तापमान, आर्द्रता, दबाव, हवाओं की दिशा-गति की जानकारी एकत्र कर ट्रांसमीटर को देता। यह ट्रांसमीटर भूगोल विभाग की छत पर लगे रिसीवर को डेटा भेजता है, जो स्क्रीन पर लगातार प्रदर्शित होता रहता है।
भविष्य में होगा फायदा
भूगोल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी ने बताया कि महीने में दो गुब्बारे छोड़े जा रहे हैं। साल में 24 गुब्बारे छोड़े जाएंगे। किस महीने में मौसम का तापमान, आर्द्रता और दबाव कैसा रहा, इस आंकड़े से आने वाले साल में मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाएगा।

