10 बीघा जमीन का विवाद भी न सुलझा पाई पुलिस, चली गई अधिवक्ता की जान
जून में कदौरा थाने से लेकर एसपी तक से की थी शिकायत, सुनवाई न होने पर कोर्ट की ली थी शरण
संवाद न्यूज एजेंसी
कालपी। बार एसोसिएशन अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की हत्या के पीछे करीब दस बीघा जमीन पर कब्जे को लेकर रंजिश की बात सामने आ रही है। हैरत की बात यह है कि शासन की वरीयता में सबसे महत्वपूर्ण जमीन संबंधी विवाद ही निपटाना होता है। क्योंकि कई बार देखा गया है कि जमीन का विवाद दो पक्षों में खूनी संघर्ष का रूप ले लेता है और कई जाने चली जाती हैं। इसके बाद भी जालौन पुलिस का हाल ये रहा कि पांच तक बार संघ का अध्यक्ष होने के बाद भी गयादीन को अपना जमीन का विवाद सुलझाने के लिए भटकना पड़ा।
परिजनों के मुताबिक गयादीन ने चार जून को कदौरा थाने में तहरीर दी थी लेकिन सुनवाई न होने पर एसपी को भी प्रार्थना पत्र दिया। जब दोनों जगह से उन्हें न्याय नहीं मिला तो तब न्यायालय की शरण ली और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए वाद दायर किया। परिवार के मुताबिक इस दौरान उन्हें कई बार धमकी भी मिली। शनिवार को इसी मुकदमे की पैरवी कर न्यायालय से लौटते समय उनका अपहरण कर हत्या कर दी गई। पुलिस भी प्रारंभिक जांच में जमीन विवाद को हत्या की वजह बता रही है।
परिजन के मुताबिक मौजा हांसा परगना कालपी में आराजी संख्या 1062 में 5.986 हेक्टेयर भूमि का एक खेत है। इस जमीन पर कानपुर निवासी इंद्रपाल सिंह उर्फ इंद्रजीत सिंह यादव की नजर थी। तहरीर में गयादीन अहिरवार ने आरोप लगाया था कि 13 जून 2026 को उन्हें सूचना मिली कि इंद्रजीत उर्फ इंद्रपाल सिंह, उसकी पत्नी सविता यादव, धर्मेंद्र कुमार विश्वकर्मा, देशराज और राजू दो अज्ञात लोगों के साथ खेत में ट्यूबवेल लगाने के लिए गड्ढा खोदवा रहे हैं। सूचना पर वह खेत पहुंचे और मौके पर मौजूद लोगों को देखकर डायल 112 पर सूचना दी। पुलिस को फोन करने पर सभी आरोपी बोलेरो से भाग निकले।
आरोप था कि शाम को खेत से लौटते समय चक के पुरवा के आगे हांसा-बबीना मोड़ पर आरोपियों ने उनकी बाइक रोक ली। उस समय बाइक पर उनके साथ अखिलेश कुमार भी थे। आरोपियों ने गालीगलौज करते हुए जमीन पर कब्जे की बात कही और दोनों को लाठी, कुल्हाड़ी व डंडों से पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। राहगीरों के ललकारने पर आरोपी मौके से भाग गए।

