उरई। कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता गयादीन अहिरवार की हत्या के तीन आरोपियों को पुलिस ने मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया।वारदात में इस्तेमाल कार बरामद कराने पहुंची पुलिस टीम पर आरोपियों ने फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में दो आरोपियों के पैर में गोली लगी, जबकि तीसरे को पुलिस ने पकड़ लिया। मुख्य आरोपी मोनू यादव अभी फरार है। जमीन के विवाद में इंद्रजीत ने रुपये देकर मोनू यादव और उसके साथियों के माध्यम से हत्या की साजिश रची थी।
पुलिस के अनुसार, कालपी के अधिवक्ता गयादीन अहिरवार का अपहरण किए जाने के बाद परिजनों ने उनकी काफी खोजबीन की थी। इसके बाद शाम करीब छह बजे पुलिस को घटना की सूचना दी गई। परिजनों की तहरीर पर कालपी कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत के नेतृत्व में अपर पुलिस अधीक्षक, तीन क्षेत्राधिकारियों और आठ थानों की पुलिस टीमों ने संयुक्त अभियान चलाया। इस दौरान सर्वेश, आशीष और केशव को गिरफ्तार किया गया। उनकी निशानदेही पर सचेंडी के पास से गयादीन का शव और आलाकत्ल बरामद किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में विश्व बैंक कॉलोनी बर्रा आठ, कानपुर नगर निवासी सर्वेश शुक्ला उर्फ सब्बू (27), न्यू डायमंड सिटी पिपौरी, थाना गुजैनी कानपुर नगर निवासी आशीष विश्वकर्मा (27) और वरुण विहार कॉलोनी बर्रा आठ, कानपुर नगर निवासी केशव कटियार (26) शामिल हैं।
पुलिस ने पूछताछ के दौरान आरोपियों से वारदात में इस्तेमाल कार के बारे में जानकारी ली। आरोपियों ने बताया कि कार को कालपी क्षेत्र के जंगल में छिपा दिया गया है। इस पर कालपी कोतवाली पुलिस और एसओजी की टीम उन्हें साथ लेकर कार बरामद करने पहुंची। आरोपियों ने जोल्हूपुर से मदारीपुर के बीच अन्ना फार्म हाउस के रास्ते पर कार खड़ी होने की जानकारी दी। पुलिस टीम वहां पहुंची तो अंधेरे और झाड़ियों का फायदा उठाकर पहले से छिपे आरोपियों ने पुलिस पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग शुरू कर दी।
पुलिस टीम ने आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की। इसमें सर्वेश शुक्ला और आशीष विश्वकर्मा के पैर में गोली लगी, जबकि केशव कटियार को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। घायल आरोपियों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने मौके से वारदात में इस्तेमाल कार भी बरामद कर ली है। मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। वहीं, फरार मुख्य आरोपी मोनू यादव की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।
मुकदमा वापस लेने के लिए दी थी धमकी, कहा था- नहीं तो अंजाम बुरा होगा
अधिवक्ता गयादीन अहिरवार और इंद्रजीत यादव के बीच कदौरा क्षेत्र की जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इस मामले में दोनों पक्षों के बीच मुकदमेबाजी भी हो रही थी। बताया जा रहा है कि पिछले मुकदमे के दौरान इंद्रजीत यादव ने गयादीन पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया था। उसने साफ शब्दों में धमकी दी थी कि मुकदमा वापस ले लो, नहीं तो अंजाम बुरा होगा। इसके बावजूद गयादीन पीछे नहीं हटे और मुकदमे की पैरवी जारी रखी। पुलिस की जांच में सामने आया कि इसी रंजिश में इंद्रजीत ने रुपये देकर मोनू यादव को हत्या की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद साजिश के तहत गयादीन का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई। जमीन के विवाद में पहले दी गई धमकी और फिर अपहरण के बाद हत्या की वारदात ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।

