Muzaffarnagar । एस.डी. कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के बी.सी.ए. विभाग की ओर से विद्यार्थियों में सामाजिक जागरूकता, तार्किक चिंतन, अभिव्यक्ति क्षमता और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महिला सुरक्षा, सम्मान एवं सशक्तिकरण विषय पर विशेष वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने महिला सुरक्षा, सम्मान, समानता, शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मुद्दों पर पक्ष और विपक्ष में अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संदीप मित्तल और बी.सी.ए. विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव तायल द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों ने विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक सत्र के लिए शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
महिला सुरक्षा, सम्मान या सशक्तिकरण—प्राथमिकता क्या हो?
वाद-विवाद प्रतियोगिता का केंद्रीय विषय था—“महिला सुरक्षा, सम्मान या सशक्तिकरण—प्राथमिकता क्या हो?” विषय ने विद्यार्थियों को महिला जीवन से जुड़े विभिन्न सामाजिक और समकालीन पहलुओं पर अपने विचार रखने का अवसर दिया।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने केवल महिला सुरक्षा को लेकर अपने तर्क नहीं रखे, बल्कि यह भी चर्चा की कि महिलाओं को सुरक्षित वातावरण देने के साथ-साथ उन्हें सम्मान, शिक्षा, समान अवसर और आत्मनिर्भर बनने के पर्याप्त अवसर मिलना क्यों जरूरी है।
विद्यार्थियों ने अपने वक्तव्यों में महिला सुरक्षा को समाज के किसी एक वर्ग की जिम्मेदारी मानने के बजाय इसे सामूहिक सामाजिक दायित्व के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किए बिना किसी भी समाज के वास्तविक विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।
चार टीमों में हुआ प्रतियोगिता का आयोजन
वाद-विवाद प्रतियोगिता के लिए विद्यार्थियों को अलग-अलग टीमों में विभाजित किया गया था। टीम ए को नकारात्मक पक्ष का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी दी गई। इस टीम का नेतृत्व दृष्टि ने किया। टीम में दीक्षा धीमान, बृजांशी, खुशी पुंडीर और चंदन ने प्रतिभाग किया।
टीम बी को सकारात्मक पक्ष की शक्ति टीम के रूप में प्रतियोगिता में शामिल किया गया। टीम का नेतृत्व प्रिंस ने किया। हर्षिता, अंशिका, नीति, तनु और सोनी ने भी टीम की ओर से अपने विचार प्रस्तुत किए।
इसके अलावा टीम सी को सकारात्मक पक्ष की उन्नति टीम के रूप में रखा गया। इसका नेतृत्व वेदिका ने किया। टीम के अन्य प्रतिभागियों में सहज, गौरी, रितिका, लावी और आयुषी शामिल रहीं।
टीम डी को सकारात्मक पक्ष की अग्नि टीम के रूप में प्रतियोगिता में उतारा गया। टीम का नेतृत्व नेहा ने किया। निहारिका रानी, नंदिनी, वृधि, अपूर्वा और वंशिका दुबे ने टीम के अन्य सदस्यों के रूप में अपने विचार रखे।
“आवाज उनकी है, मुद्दा हम सबका”—विद्यार्थियों ने उठाया महत्वपूर्ण मुद्दा
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने “आवाज उनकी है, मुद्दा हम सबका—महिलाओं की सुरक्षा” जैसे विचारों को प्रमुखता से सामने रखा। विद्यार्थियों ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा को केवल महिलाओं से जुड़ा विषय मानना उचित नहीं है। यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है और इसके लिए परिवार, शिक्षण संस्थान तथा समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी भूमिका निभानी होगी।
प्रतिभागियों ने अपने तर्कों के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया कि सुरक्षित महिला ही सुरक्षित समाज की आधारशिला बन सकती है। महिला सुरक्षा के साथ-साथ सम्मान और समान अवसर भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
वाद-विवाद में महिला शिक्षा, आत्मनिर्भरता, समान अवसर, कानूनी अधिकार और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषय भी प्रमुखता से सामने आए। विद्यार्थियों ने इन मुद्दों को अलग-अलग दृष्टिकोण से रखते हुए अपने तर्क प्रस्तुत किए और यह दिखाया कि महिला सशक्तिकरण केवल एक सामाजिक नारा नहीं, बल्कि शिक्षा, अवसर, सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा व्यापक विषय है।
महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सभ्य समाज की पहचान : डॉ. संदीप मित्तल
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संदीप मित्तल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान किसी भी सभ्य एवं विकसित समाज की महत्वपूर्ण पहचान है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही उन्हें शिक्षा, समान अवसर और आत्मनिर्भरता के लिए भी पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
डॉ. संदीप मित्तल ने विद्यार्थियों को सामाजिक विषयों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवा केवल शिक्षा तक सीमित न रहें, बल्कि समाज में होने वाले महत्वपूर्ण बदलावों और सामाजिक मुद्दों को समझें तथा सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनें।
उनका संदेश प्रतियोगिता के उद्देश्य से भी जुड़ा रहा, क्योंकि वाद-विवाद जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को किसी सामाजिक विषय को अलग-अलग दृष्टिकोण से समझने और उस पर तार्किक तरीके से अपनी बात रखने का अवसर मिलता है।
वाद-विवाद से मजबूत होता है तार्किक और आलोचनात्मक चिंतन : डॉ. संजीव तायल
बी.सी.ए. विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव तायल ने कहा कि वाद-विवाद जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों में तार्किक और आलोचनात्मक चिंतन विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसी प्रतियोगिताओं से विद्यार्थियों का व्यक्तित्व निखरता है और उनकी अभिव्यक्ति क्षमता भी मजबूत होती है।
उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण जैसे सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण विषयों पर युवाओं की सक्रिय भागीदारी सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
डॉ. तायल के अनुसार, जब विद्यार्थी किसी सामाजिक मुद्दे पर अपने विचार रखते हैं तो उन्हें केवल बोलने का अवसर नहीं मिलता, बल्कि वे दूसरे पक्ष के तर्कों को सुनने, समझने और उनका विश्लेषण करने की क्षमता भी विकसित करते हैं।
पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ विद्यार्थियों ने रखे तर्क
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों में खासा उत्साह दिखाई दिया। प्रतिभागियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने विचार प्रस्तुत किए। महिला सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण जैसे विषय पर विद्यार्थियों ने अलग-अलग दृष्टिकोण सामने रखे।
प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने के साथ-साथ दूसरों के विचारों को समझने का अवसर भी दिया। इसके माध्यम से विद्यार्थियों ने सामाजिक मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने और अपने तर्क को तथ्यों एवं विचारों के आधार पर प्रस्तुत करने का अभ्यास किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन कार्यक्रम समन्वयक चन्दना दीक्षित के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर विशेष अतिथि श्रीमती रितु मित्तल की गरिमामयी उपस्थिति भी रही।
निर्णायक मंडल ने तर्क, विषय की समझ और प्रस्तुतीकरण के आधार पर किया मूल्यांकन
प्रतियोगिता के बाद निर्णायक मंडल द्वारा प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया। निर्णायक मंडल में श्री हिमांशु शर्मा, श्री अनुज काकरान और श्री अनुज गोयल शामिल रहे।
प्रतिभागियों के मूल्यांकन के दौरान उनके तर्क, विषय की समझ, प्रस्तुतीकरण, अभिव्यक्ति कौशल और आत्मविश्वास जैसे विभिन्न पहलुओं को आधार बनाया गया। इसके बाद प्रतियोगिता के परिणाम घोषित किए गए।
अग्नि टीम ने हासिल किया प्रथम स्थान
घोषित परिणामों में अग्नि टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिता में अवनी ने द्वितीय स्थान हासिल किया, जबकि शक्ति टीम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेताओं को बधाई दी गई। इसके साथ ही प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले सभी विद्यार्थियों को उनकी सक्रिय और उत्साहपूर्ण सहभागिता के लिए प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
आयोजकों की ओर से सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की गई और विद्यार्थियों को भविष्य में भी इसी प्रकार सामाजिक सरोकारों से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने के लिए प्रेरित किया गया।
सामाजिक मुद्दों से जुड़ी गतिविधियों में विद्यार्थियों की भागीदारी पर जोर
कार्यक्रम के सफल आयोजन में बी.सी.ए. विभाग के शिक्षकों और विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को अपनी अभिव्यक्ति क्षमता दिखाने के साथ-साथ महिला सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषय को समझने का अवसर दिया।
ऐसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में मंच पर अपनी बात रखने का आत्मविश्वास बढ़ने के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता भी विकसित होती है। प्रतियोगिता में शामिल विद्यार्थियों ने अपने तर्कों के माध्यम से यह संदेश दिया कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज से जुड़ा दायित्व है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और सक्रिय सहभागिता के लिए बधाई दी गई। विद्यार्थियों को भविष्य में भी सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों और गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।
एस.डी. कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज में आयोजित यह वाद-विवाद प्रतियोगिता विद्यार्थियों के लिए केवल मंच पर अपनी बात रखने का अवसर नहीं रही, बल्कि महिला सुरक्षा, सम्मान, समानता और सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर सोचने और अपने विचारों को तार्किक ढंग से प्रस्तुत करने का माध्यम भी बनी। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने यह दिखाया कि युवा पीढ़ी सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर जागरूक है और सकारात्मक बदलाव में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
