Kanpur: Leopard 'Murad' dies at the zoo; infection and cardiac arrest suspected

तेंदुए की मौत
– फोटो : अमर उजाला

चिड़ियाघर में वन्यजीवों की लगातार हो रही मौतों ने उनकी सेहत और देखभाल व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। बुधवार की रात 13 वर्षीय तेंदुए मुराद की मौत हो गई। उसे 21 अगस्त 2018 को मुरादाबाद वन विभाग से रेस्क्यू करके कानपुर चिड़ियाघर लाया गया था।


खूंखार स्वभाव के चलते उसे अस्पताल परिसर में अलग बाड़े में रखा गया था। चिड़ियाघर के निदेशक कन्हैया पटेल ने बताया कि कुछ समय पहले तेंदुए मुराद ने अपने बाड़े में खुद को घायल कर लिया था। उसके पैर में काफी चोटें आई थीं। इसके बाद उसे उपचार के लिए पशु चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था जहां करीब एक सप्ताह से उसका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान मुराद बार-बार अपने घाव को ताजा कर लेता था। इससे संक्रमण बढ़ता गया। आशंका जताई जा रही है कि वह सेप्टीसीमिया यानी खून में संक्रमण की चपेट में आ गया था। शुरुआती जांच में कार्डियक अरेस्ट की आशंका भी सामने आई है। हालांकि मौत का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। पुष्टि के लिए तेंदुए के शव को भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) इज्जतनगर, बरेली भेजा जाएगा।

हिरणों की मौत का कारण अब तक स्पष्ट नहीं

सितंबर में चिड़ियाघर में काले हिरणों की लगातार मौतों ने भी चिंता बढ़ाई थी। शुरुआती जांच में उनके गुर्दों और फेफड़ों में संक्रमण को संभावित कारण माना गया था। मामले की पड़ताल के लिए आईवीआरआई की विशेष टीम चिड़ियाघर पहुंची थी। टीम ने बचे हुए हिरणों की जांच कराने के साथ उनके बाड़े को सैनिटाइज भी कराया था। इसके बावजूद मौतों की असली वजह की पुष्टि नहीं हो सकी है। इसके बाद जेब्रा के बच्चे और बायसन की मौत हुई थी।



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