मुगलों की सत्ता और वैभव के प्रतीक आगरा किले में 12 जून को महाराजा सूरजमल की शौर्यगाथा गूंजेगी। 265 साल पहले 12 जून 1761 को मुगलों से आगरा किला जीतने वाले भरतपुर नरेश महाराजा सूरजमल के पराक्रम को याद करते हुए प्रदेश सरकार विजय दिवस मनाएगी। आगरा किले के जहांगीरी महल में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग को विजय दिवस मनाने की अनुमति जारी कर दी गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 700 लोगों को इस कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी है।

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी शक्ति सिंह ने बताया कि महाराजा सूरजमल ने 265 साल पहले आगरा किले को मुगलों से जीता था। प्रदेश सरकार इस मौके पर विजय दिवस का आयोजन करा रही है। इसमें प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के साथ प्रदेश सरकार के कई मंत्री शामिल होंगे।

 




Agra Fort to Celebrate Maharaja Surajmal Victory Day, Marking 265 Years of Historic Conquest

आगरा किला
– फोटो : ai


लखनऊ के कलाकार महाराजा सूरजमल के शौर्य और पराक्रम से जुड़े प्रसंगों का मंचन करेंगे। आगरा किला पर जाटों के शासन के बारे में नाट्य मंचन के जरिये बताया जाएगा। दो सांस्कृतिक कार्यक्रम विजय दिवस समारोह में होंगे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इसके लिए 700 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी है। दीवान-ए-आम के पास जहांगीरी महल में विजय दिवस समारोह आयोजित किया जाएगा। यहां फरवरी में महाराष्ट्र सरकार ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया था।

 


Agra Fort to Celebrate Maharaja Surajmal Victory Day, Marking 265 Years of Historic Conquest

आगरा किला
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4000 सैनिकों ने 40 दिन की घेराबंदी कर जीता था किला

पुरातत्वविद डॉ. एमसी शर्मा ने बताया कि महाराजा सूरजमल ने आगरा किला जीतने के लिए सेनानायक बलराम के नेतृत्व में चार हजार सैनिकों की फौज भेजी थी। ये सैनिक 3 मई 1761 को आगरा पहुंचे और 40 दिन तक आगरा किले को घेरे रहे। मुगल सेना के किलेदार के पास तब महज 400 सैनिक ही थे।


Agra Fort to Celebrate Maharaja Surajmal Victory Day, Marking 265 Years of Historic Conquest

आगरा किला
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महाराजा सूरजमल 4 जून 1761 को आगरा पहुंचे और किले के सैनिकों के शहर में रह रहे परिजन को बंधक बना लिया था। तब किलेदार ने एक लाख रुपये और पांच गांव मिलने के आश्वासन पर किला सौंप दिया था। 12 जून 1761 को आगरा किले पर महाराजा सूरजमल ने कब्जा किया। यहां उन्हें 50 लाख रुपये और तोपों के साथ गोला-बारूद मिला था।

 


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आगरा किला
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13 साल तक किले पर रहा जाटों का शासन

महाराजा सूरजमल ने संपत्ति और तोपों को डीग व भरतपुर किले में भिजवा दिया था। ताजमहल में शाहजहां व मुमताज की कब्र के कक्ष पर लगे चांदी के दरवाजे उतरवाकर गलवा दिए। भरतपुर रियासत के अधीन आगरा किला 1774 तक कुल 13 साल रहा। मुगल फौजदार मिर्जा नजफ खां ने 18 फरवरी 1774 को आगरा किले पर फिर अधिकार कर लिया। इस दौरान दीवान-ए-आम के पास रतन सिंह की हवेली का निर्माण कराया गया। इसके बाद महादजी सिंधिया ने वर्ष 1785 में आगरा किले पर अधिकार कर लिया था।




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