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सिपाही प्रांशु की मौत का मामला
– फोटो : अमर उजाला
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सड़क हादसे में घायल होने के बाद जाम में फंसने से जान गंवाने वाले सिपाही प्रांशु सचान का शव बृहस्पतिवार दोपहर करीब 3:30 बजे पैतृक गांव मोतीपुर पहुंचा तो पूरे गांव में मातम छा गया। जिस इकलौते बेटे से माता-पिता को बुढ़ापे का सहारा बनने और बहन की शादी की उम्मीद थी, उसकी अर्थी देखकर मां विभा की चीख निकल गई। बहन चांदनी बदहवास हो गईं, जबकि पिता प्रमोद सचान की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। परिवार के लोगों का कहना था कि अगर प्रांशु को समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। वे व्यवस्था को भी कोसते रहे।
प्रांशु परिवार का इकलौता बेटा था। परिवार के पास महज ढाई बीघा खेती है और पिता गांव में शिक्षामित्र हैं। पुलिस में नौकरी मिलने के बाद प्रांशु ने घर की जिम्मेदारियां अपने कंधों पर उठा ली थीं। परिवार को उम्मीद थी कि उसकी कमाई से आर्थिक स्थिति सुधरेगी और बड़ी बहन चांदनी की शादी धूमधाम से होगी। प्रांशु बहन के लिए लड़का भी तलाश रहा था। घर में उसकी शादी को लेकर बुने जा रहे सपने भाई की मौत के साथ ही बिखर गए।

