उत्तर रेलवे ने इस बार गर्मियों की छुट्टियों के लिए करीब 80 स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। 10 ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े गए हैं। इसके बावजूद भीड़ के आगे यह सभी व्यवस्थाएं नाकाफी साबित हो रही हैं। हालात ऐसे हैं कि कन्फर्म टिकट लेकर सफर करने वाले यात्रियों को भी अपनी सीट तक पहुंचने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।
मंगलवार को मुरादाबाद रेल मंडल से गुजरने वाली कई ट्रेनों में आरक्षित कोचों में अनारक्षित यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिली। इससे यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शहीद एक्सप्रेस, अर्चना एक्सप्रेस, श्रमजीवी एक्सप्रेस, सप्तक्रांति एक्सप्रेस और लिंक एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों के स्लीपर कोचों का हाल जनरल डिब्बों जैसा नजर आया।
कोचों के गेट, गलियारे और शौचालयों के बाहर तक यात्री बैठे मिले। कई यात्रियों को अपने आरक्षित बर्थ तक पहुंचने में काफी समय लग गया। कुछ जगहों पर सीट को लेकर कहासुनी की स्थिति भी बनी। लिंक एक्सप्रेस में एक बुजुर्ग महिला को अपनी आरक्षित सीट पर बैठने में दिक्कत का सामना करना पड़ा।
कोच में मौजूद अनारक्षित यात्रियों के कारण वह अपनी सीट तक नहीं पहुंच पा रही थीं। उनके परिजनों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद आरपीएफ कर्मी संबंधित कोच में पहुंचे और आरक्षित कोच में सफर कर रहे अनारक्षित यात्रियों को बाहर निकालकर जनरल डिब्बों की ओर भेजा।
इसके बाद महिला अपनी सीट पर बैठ सकीं। यात्रियों का कहना है कि अधिकांश ट्रेनों में वेटिंग सूची लंबी चल रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में यात्री किसी तरह ट्रेन में चढ़कर आरक्षित कोचों में भी सफर कर रहे हैं। हरिद्वार, देहरादून, दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, पंजाब और बिहार रूट की ट्रेनों में भीड़ सबसे अधिक देखने को मिल रही है।
टीटीई कर्मचारियों को टिकट जांच में कठिनाई का सामना करना पड़ा। भीड़ के कारण कई कोचों में वे आसानी से एक छोर से दूसरे छोर तक नहीं पहुंच सके। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेष ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।
साथ ही कई ट्रेनों में अतिरिक्त कोच भी जोड़े गए हैं। मंडल रेल प्रबंधक विनीता श्रीवास्तव ने बताया कि आरक्षित कोचों में अनधिकृत यात्रा रोकने के लिए टिकट जांच अभियान लगातार चलाया जा रहा है और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।
