लखनऊ के गोमतीनगर के मिठाई वाला चौराहे के पास 20 अगस्त को पत्नी दिव्या मिश्रा और हुसड़िया चौराहा स्थित घर में बहन तूलिका की हत्या के बाद आत्महत्या करने वाले मानस बाजपेयी पर दर्ज हुई एफ आई आर के मामले में नया तथ्य सामने आया है। पता चला है कि दिव्या का बीमा और बैंक में फंसी रकम बिना एफआईआर के नहीं निकाली जा सकती थी। यही वजह है कि पुलिस ने मृतक मानस पर हत्या की एफआईआर दर्ज की है। दिव्या मिश्रा आईसीआईसीआई बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर थीं। दिव्या की हत्या भी बैंक के ठीक सामने हुई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक प्रबंधन ने डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा से संपर्क किया था। प्रबंधन ने कहा था कि बीमा और अन्य धनराशि के लिए प्राथमिकी दर्ज कराना आवश्यक है। इसके बाद ही दिव्या के पिता सतीश चंद्र मिश्रा ने गोमतीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इंस्पेक्टर ब्रजेश चंद्र तिवारी के मुताविक पुलिस को मानस के शव के पास से तीन असलहे मिले थे। बरामद असलहों को नष्ट कराया जाएगा। बिना एफआईआर के असलहों को नष्ट नहीं कराया जा सकता।
