Mountain driving mistakes: गर्मियों की छुट्टियां शुरू होते ही हजारों लोग पहाड़ों की ठंडी वादियों की ओर निकल पड़ते हैं। परिवार और दोस्तों के साथ कार से हिल स्टेशन तक का सफर काफी दिलचस्प होता है, लेकिन पहाड़ी रास्तों पर ड्राइविंग मैदानों की तुलना में कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण होती है। कटीले मोड़, लंबी चढ़ाई, खड़ी ढलान और बदलता मौसम न केवल ड्राइवर बल्कि वाहन के लिए कठिन होते हैं। ऐसे में अगर आप बिना तैयारी के निकलते हैं, तो छोटी सी लापरवाही बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।
पहाड़ों की ड्राइविंग क्यों होती है अलग?
मैदानी इलाकों में कार चलाने और पहाड़ी रास्तों पर ड्राइविंग करने में बड़ा अंतर होता है। यहां सड़कें संकरी होती हैं, लगातार मोड़ आते हैं और वाहन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में इंजन, ब्रेक, क्लच और टायर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यही वजह है कि हिल स्टेशन जाने से पहले कार की स्थिति और ड्राइविंग तकनीक दोनों पर ध्यान देना बेहद जरूरी माना जाता है।
लगातार ब्रेक दबाना बन सकता है बड़ी गलती
पहाड़ी रास्तों पर सबसे आम गलती लगातार ब्रेक का इस्तेमाल करना है। खासकर ढलान पर कई ड्राइवर बार-बार ब्रेक दबाकर गाड़ी नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। इससे ब्रेक सिस्टम ज्यादा गर्म हो सकता है और उसकी कार्य करने की क्षमता कम होने लगती है। कई मामलों में ब्रेक फेड होने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे वाहन को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।
सही गियर का इस्तेमाल है सबसे जरूरी
पहाड़ों में ड्राइविंग करते समय लोअर गियर आपका सबसे बड़ा साथी होता है। चढ़ाई और उतराई दोनों में सही गियर का इस्तेमाल वाहन को बेहतर कंट्रोल में रखता है। ऐसे में उतरने के लिए इंजन ब्रेकिंग का इस्तेमाल करने से ब्रेक पर दबाव कम पड़ता है और वाहन सुरक्षित तरीके से नियंत्रित रहता है।
ब्लाइंड मोड़ों पर ओवरटेक करना पड़ सकता है भारी
पहाड़ी सड़कों पर कई मोड़ ऐसे होते हैं जहां सामने से आने वाला वाहन दिखाई नहीं देता। ऐसे ब्लाइंड मोड़ों पर ओवरटेक करने की कोशिश बेहद जोखिम भरी साबित हो सकती है। ऐसे में एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि मोड़ों पर धैर्य रखें और केवल पूरी तरह साफ दृश्य मिलने पर ही ओवरटेक करें।
जरूरत से ज्यादा सामान भी बढ़ाता है खतरा
कई लोग छुट्टियों पर जाते समय कार में जरूरत से ज्यादा सामान भर लेते हैं। अतिरिक्त वजन इंजन, सस्पेंशन और ब्रेक सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इसका असर कार की परफॉर्मेंस, माइलेज पर पड़ सकता है। इसलिए केवल जरूरी सामान ही साथ रखें।
ट्रिप से पहले जरूर करवाएं ये जांच
किसी भी पहाड़ी यात्रा पर निकलने से पहले कार की बेसिक जांच कराना जरुरी है। जैसे टायरों की स्थिति और एयर प्रेशर, ब्रेक सिस्टम, इंजन ऑयल, कूलेंट लेवल, बैटरी की स्थिति और क्लच और गियर सिस्टम। अगर आपकी कार की सर्विस काफी समय से नहीं हुई है, तो यात्रा से पहले सर्विसिंग जरूर करवा लें।
सुरक्षित सफर के लिए अपनाएं ये टिप्स
- पहाड़ों में हमेशा नियंत्रित गति से वाहन चलाएं। तेज रफ्तार यहां दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण बन सकती है।
- मोड़ों पर हॉर्न का इस्तेमाल करें ताकि सामने से आने वाले वाहन को आपकी मौजूदगी की जानकारी मिल सके।
- लंबे सफर के दौरान बीच-बीच में रुककर कार और ड्राइवर दोनों को आराम देना भी फायदेमंद होता है।
कार में ये जरूरी सामान हमेशा रखें
हिल स्टेशन ट्रिप पर निकलते समय अपनी कार में फर्स्ट एड बॉक्स, टॉर्च, अतिरिक्त पानी, पंचर रिपेयर किट और मोबाइल चार्जर जैसे बेसिक टूल किट जरूर रखें। ये सामान किसी भी आपात स्थिति में काफी मददगार साबित हो सकते हैं।
खराब मौसम में रखें अतिरिक्त सावधानी
पहाड़ी इलाकों में मौसम कभी भी बदल सकता है। बारिश, धुंध और तेज हवाएं विजिबिलिटी को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे समय में लो बीम हेडलाइट का इस्तेमाल करें, गति कम रखें और वाहन के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
