फिरोजाबाद के टूंडला के अकबरपुर स्थित प्रख्यात संत बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली के पैतृक मकान पर उठे स्वामित्व विवाद में जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। डीएम के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति के अध्यक्ष एवं एडीएम (न्यायिक) अरविंद द्विवेदी ने बाबा की छह पोतियों तथा श्री ठाकुर हनुमानजी ट्रस्ट के पदेन ट्रस्टी संजय गुप्ता को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। प्रशासन ने दोनों पक्षों से अपनी-अपनी दावेदारी, साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। ताकि प्रकरण की निष्पक्ष सुनवाई कर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा सके।
बाबा नीब करौरी (लक्ष्मी नारायण शर्मा) के छोटे पुत्र स्वर्गीय धर्म नारायण शर्मा की छह पुत्रियों सुनीता, अर्चना, वंदना, भावना, रितु और रिचा ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को अगस्त माह में प्रार्थना पत्र सौंपा था।
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बाबा नीब करौरी जन्मस्थली
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ये है आरोप
ग्राम पंचायत नगला स्थित मकान संख्या 154-व (बाबा का ध्यान कक्ष, भोजनालय व शयन कक्ष) पर श्री ठाकुर हनुमानजी ट्रस्ट के ट्रस्टी संजय गुप्ता ने एकाधिकार कर लिया है। मुंबई से आए भावना रावत के पति मनोज रावत ने डीएम से मुलाकात कर पैतृक संपत्ति को कब्जा मुक्त कराने और विवाद के स्थायी समाधान के लिए डीएम की अध्यक्षता में शासकीय प्रशासनिक ट्रस्ट बनाने की मांग रखी थी।
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बाबा नीब करोरी
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वर्तमान में शासन द्वारा अकबरपुर में बाबा नीब करौरी धाम कॉरिडोर का निर्माण कराया जा रहा है। एडीएम अरविंद द्विवेदी ने बताया कि प्रशासन ने नोटिस जारी कर सभी पक्षों को साक्ष्य देने के लिए कहा है।
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बाबा नीब करौरी के छोटे बेटे के साथ बेटियां
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
1996 में बाबा की पत्नी रामबेटी ने कराया था ट्रस्ट का गठन
श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट का गठन वर्ष 1996 में बाबा की धर्मपत्नी स्वः रामबेटी शर्मा द्वारा किया गया था। कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में ट्रस्ट में 18 सदस्य हैं और बाबा की आगरा निवासी बेटी गिरजा भटेले स्वयं इसकी अध्यक्ष हैं।
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विकास कार्य का डाटा देखते डीएम और अन्य अधिकारी
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके अलावा बाबा के बड़े बेटे स्वः अनेक सिंह शर्मा की बड़ी बेटी सुनीता शर्मा के पति त्रिलोकी चंद्र शर्मा, दूसरी बेटी अर्चना शर्मा और बेटे डॉ. धनंजय शर्मा भी ट्रस्ट में शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी सदस्य सेवा भावना से कार्य कर रहे हैं और संपत्ति का कोई निजी उपयोग नहीं हो रहा है, जो भी निष्पक्ष होकर सेवा करना चाहता है, उसका स्वागत है।