लगभग 9 साल पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 अक्तूबर, 2017 को ताजमहल के 1.5 किमी आगे नगला पैमा में रबर डैम का शिलान्यास किया था। 3,160 दिनों के लंबे इंतजार के बाद रबर डैम के निर्माण में एक ईंट भी नहीं लग पाई, जबकि 50 करोड़ रुपये का बजट सिंचाई विभाग को दिया गया था। डबल इंजन सरकार में 9 साल के बाद केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट पर रबर डैम की जगह अब बैराज बनाने का सुझाव दिया गया है। हैरतअंगेज पहलू ये है कि सभी एनओसी मिलने के बाद यह आपत्ति की गई। बैराज बनाने के लिए सभी एनओसी दोबारा से लेनी पड़ेंगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को पीडब्ल्यूडी की समीक्षा के लिए आगरा आ रहे हैं। शहर के पर्यावरणविदों और यमुनाप्रेमियों ने जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि वह बैराज का मामला उठाएं। 9 साल से यह अटका हुआ है। दरअसल, केंद्रीय जल आयोग ने नगला पैमा में प्रस्तावित रबर डैम योजना को तकनीकी रूप से व्यावहारिक न मानते हुए उसे निरस्त कर दिया है। इसके स्थान पर आयोग ने ताजमहल के पीछे डाउन स्ट्रीम में यमुना पर एक पारंपरिक पक्का बैराज बनाने की सिफारिश की है। इसमें तकनीकी दिक्कत यह है कि दोबारा सभी एनओसी लेनी होंगी, जिसमें 9 साल का समय लग गया। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र सिंह फोगाट ने बताया कि बैराज के संबंध में सिंचाई विभाग के पास अभी कोई निर्देश नहीं है। शासन के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।