राजधानी लखनऊ के गोमती नगर स्थित भरवारा रेलवे क्रॉसिंग पर प्रस्तावित रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया अब नए सिरे से शुरू होगी। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अधिग्रहण प्रक्रिया में गंभीर प्रक्रियागत खामियां पाईं। कोर्ट ने राज्य सरकार को धारा-11 के तहत नई या संशोधित अधिसूचना जारी कर कानून के अनुसार पूरी कार्रवाई दोबारा करने का निर्देश दिया है।
इसके अतिरिक्त, परियोजना की प्रगति पर निगरानी रखने के लिए स्वतः संज्ञान जनहित याचिका दर्ज करने का भी आदेश दिया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश जनहित याचिका व अन्य याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पारित किया। इनमें आरओबी निर्माण का मुद्दा उठाया गया था।
कोर्ट ने पाया कि प्रारंभिक अधिसूचना में भूमि अधिग्रहण से किसी परिवार के विस्थापन न होने का उल्लेख था, जबकि सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआईए) रिपोर्ट इसके विपरीत थी। इस विसंगति के कारण, बिना समुचित विचार के जारी अधिसूचना और उसके आधार पर की गई पूरी अधिग्रहण प्रक्रिया कानूनी मानकों पर खरी नहीं उतरती है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि भरवारा आरओबी का निर्माण शहर के यातायात और जनहित के लिए आवश्यक है, परंतु प्रभावित लोगों के कानूनी अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता। इसलिए, सरकार को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर धारा-11 के तहत नई या संशोधित अधिसूचना जारी कर अधिग्रहण प्रक्रिया पुनः शुरू करनी होगी। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया छह माह के भीतर संपन्न की जाए।
