मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी के अलीगंज में हुए अग्निकांड प्रदेश के लिए बड़ा सबक बताया है। कहा, इस पीड़ादायक घटना से सीख लेते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके समुचित इंतजाम करें। उन्होंने मंगलवार को शासन के अधिकारियों के साथ बैठक में प्रदेश में मिशन मोड में व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने हर जिले में फायर सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों, नर्सिंग होमों, मेडिकल कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, शॉपिंग मॉल, सरकारी भवनों तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच कर आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराएं। जनजागरूकता के बाद ही कार्रवाई की जाए। किसी भी नागरिक का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। इसके लिए हर जिले में विशेष टीम गठित करें। सभी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण करें। व्यावसायिक भवनों में अग्निशमन विभाग से प्राप्त एनओसी परिसर में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए। सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं होगा।
आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां न हों
भवन अथवा भूमि का उपयोग उसी उद्देश्य में हो जिसके लिए उसे स्वीकृति दी गई है। आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन नहीं होना चाहिए। निर्धारित उपयोग के विपरीत किसी भी प्रकार की गतिविधि स्वीकार्य नहीं होगी। किसी भी परिस्थिति में बेसमेंट में कोचिंग अथवा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन न होने पाए। यदि बेसमेंट पार्किंग के लिए स्वीकृत है तो उसका उपयोग केवल पार्किंग के लिए ही किया जाए। उन्होंने व्यावसायिक भवनों के विद्युत भार (लोड) का आकलन कराने के भी निर्देश देते हुए कहा कि जहां भार मानकों के विपरीत मिले अथवा अन्य नियमों का उल्लंघन हो रहा हो, वहां तत्काल कार्रवाई करें।
रिस्पांस टाइम भी परखा
सीएम ने घटना के संबंध में अपर मुख्य सचिव गृह, डीजीपी, डीजी अग्निशमन सेवा, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा एसडीआरएफ के अधिकारियों से घटना की सूचना मिलने के बाद किए गए राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। कहा, आपातकालीन सेवाओं का रिस्पॉन्स टाइम जितना कम होगा, राहत एवं बचाव कार्य उतने ही प्रभावी होंगे। सभी एजेंसियां अपने रिस्पॉन्स टाइम को और कम करने के लिए कदम उठाएं तथा संसाधनों का अधिकतम उपयोग करें। बैठक में बताया गया कि राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 14 एम्बुलेंस तत्काल मौके पर भेजी गई थीं। उन्होंने दिल्ली में हुई अग्नि दुर्घटना का उल्लेख करते हुए निर्देश दिए कि अग्निशमन विभाग को जिन आधुनिक उपकरणों, संसाधनों एवं सुविधाओं की आवश्यकता हो, उन्हें उपलब्ध कराने में विलंब न किया जाए।
