यमुना नदी में शुक्रवार को रूमा और प्रिंस के डूबने की घटना ने उनके साथ मौजूद लक्ष्मी (17), तनु (15) और सपना (14) को भी झकझोर दिया। तीनों किशोरियां भी नदी में डूबने लगी थीं, लेकिन अचानक पैर मिट्टी के टीले पर टिक जाने से उनकी जान बच गई। हादसे के बाद तीनों सदमे में हैं। बार-बार उनकी आंखों के सामने नदी में डूबने का मंजर आ रहा है। तनु, सपना और लक्ष्मी ने बताया कि यमुना में रूमा और प्रिंस के डूबने की आवाज सुनकर तीनों उन्हें बचाने के लिए एक-दूसरे का हाथ पकड़कर नदी में उतर गई थीं। अचानक पानी में डूबने लगीं।
इसी दौरान उनके पैर नीचे मिट्टी के टीले पर टिक गए। तीनों ने जमीन का सहारा पाकर पूरी ताकत से बाहर की ओर छलांग लगा दी और किनारे पहुंच गईं। घटना के बाद तीनों रोते हुए बोलीं कि उन्हें अब भी विश्वास नहीं हो रहा है कि वे जिंदा बच गईं। उन्होंने कहा कि उन्होंने मौत को बहुत करीब से देखा है। हादसे के बाद उनके हाथ-पैर कांप रहे हैं। परिजन तीनों को ढांढस बंधा रहे हैं, लेकिन आंखें बंद करते ही नदी में डूबने का वह मंजर उनके सामने आ जाता है। वहीं, रूमा और प्रिंस के परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है।
मां बार-बार बोली- हे प्रभु, मेरी बेटी को किसी तरह बचा दो
पिन्नापुरा निवासी ताराचंद घर के बाहर परचून का खोखा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनके पांच बच्चे हैं। बड़ी बेटी और पुत्र की शादी हो चुकी है। मोनू (18), खुशबू (16) और रूमा (14) है। शुक्रवार को रूमा के यमुना नदी में डूबने की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। मां फूलमती गश खाकर जमीन पर गिर पड़ीं। वह रोते हुए बार-बार यही कह रही थीं ,हे प्रभु, मेरी बेटी को किसी तरह बचा दो। वह बार-बार बेहोश हो रही थीं। गांव की महिलाएं पानी के छींटे डालकर उन्हें होश में लाने का प्रयास करती रहीं।
बेटे की मौत की खबर से सदमे में माता-पिता
प्रिंस के पिता किशनलाल बिजली फिटिंग का काम करते हैं। उनके तीन बच्चे हैं। प्रिंस (11), बाबू (5) और दो माह की छोटी बेटी है। प्रिंस के यमुना में डूबने की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। मां कमलेश और पिता किशनलाल का रो-रोकर बुरा हाल है। मां कमलेश रोते हुए बार-बार कह रही थीं हे भगवान, तूने मेरे बेटों की जोड़ी तोड़ दी। प्रिंस कक्षा एक का छात्र था। परिजन का रो रोकर बुरा हाल है
