शहर की अंदरूनी सड़कें मौत बांट रही हैं। एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे पर होने वाले हादसों से कहीं अधिक कहर शहर और कस्बों को जोड़ने वाली अंदरूनी सड़कों पर टूट रहा है। जनवरी से अगस्त 2026 तक इन सड़कों पर हुए 343 हादसों में 173 लोगों की जान चली गई। जिले में सड़क हादसों में मरने वालों की यह सबसे बड़ी संख्या है। सड़क सुरक्षा समिति की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े सड़क सुरक्षा के दावों के बीच हादसों की भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, आठ माह में जिले में कुल 834 सड़क हादसे हुए, जिनमें 487 लोगों की मौत हो गई। एक्सप्रेसवे पर 22 हादसों में 21 लोगों की जान गई, जबकि नेशनल हाईवे पर 230 हादसों में 149 लोग काल के गाल में समा गए। स्टेट हाईवे पर 117 हादसों में 77 लोगों की मौत हुई। जिले की प्रमुख सड़कों पर 77 हादसों में 43 और ग्रामीण सड़कों पर 45 हादसों में 24 लोगों की जान चली गई। सबसे ज्यादा 343 हादसे अंदरूनी सड़कों पर हुए, जिनमें 173 लोगों की मौत हुई। हालांकि, पिछले साल के मुकाबले हादसों और मृतकों की संख्या में कमी आई है। जनवरी से अगस्त 2025 तक जिले में 982 हादसों में 513 लोगों की मौत हुई थी। इस साल हादसों में 148 और मृतकों की संख्या में 26 की कमी दर्ज की गई है।
एआरटीओ प्रवर्तन आलोक कुमार ने बताया कि एक्सप्रेस-वे, हाईवे पर सतत निगरानी रहती है। सुरक्षा व्यवस्था के साथ वाहनों की स्पीड की माॅनीटरिंग भी होती है। संकेतक लगाए जाते हैं। ओवर स्पीड पर चालान किया जाता है। जो अंदरूनी सड़कें हैं। उन पर ऐसी व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा अतिक्रमण भी हादसों की वजह बनता है।
मार्ग की श्रेणी सड़क हादसे मृतकों की संख्या
एक्सप्रेस-वे 22 21
नेशनल हाईवे 230 149
स्टेट हाईवे 117 77
जिले की मुख्य सड़कें 77 43
अंदरूनी सड़कें 343 173
ग्रामीण सड़कें 45 24
