हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) पद से जुड़े अवमानना मामले में सख्त आदेश दिया है। कोर्ट ने 8 मई 2026 के आदेश का पालन न होने पर नामित अफसरों को आरोप निर्धारण के लिए 5 अक्तूबर तक पेश होने को कहा है। पिछले माह कोर्ट ने मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल समेत चार अफसरों को अवमानना नोटिस जारी की थी।
16 सितंबर को चिकित्सा शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित घोष और सचिव नेहा शर्मा कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने बताया कि 8 मई के आदेश का मामला विचाराधीन है। इस पर गौर कर निर्णय लिया जाएगा। अफसरों ने दो सप्ताह में पूरे तथ्यों के साथ निजी हलफनामा दाखिल करने को कहा।
कोर्ट ने मामले को 5 अक्तूबर को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने यह आदेश डॉ. मुकेश यादव की अवमानना याचिका पर दिया। याचिका में 8 मई 2026 के हाईकोर्ट आदेश की अवज्ञा का आरोप है। मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल व तीन अन्य अफसरों को इसमें पक्षकार बनाया गया है।
8 मई 2026 को हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश दिया था। इसमें राज्य सरकार को निर्देश था कि डीजीएमई पद राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों के स्थायी प्रधानाचार्यों पर विचार किए बिना न भरा जाए। न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने 8 मई को यह आदेश डॉ. मुकेश यादव की एक अन्य याचिका पर दिया था। उस याचिका में उत्तर प्रदेश में डीजीएमई पद भरने का मुद्दा उठाया गया था। वर्तमान अवमानना याचिका इसी आदेश के पालन न होने से संबंधित है।
