झारखंड में जेन-जी के आंदोलन के बाद कई भर्ती परीक्षाएं निरस्त कर दी गईं लेकिन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच शुरू हुए नौ साल बीत रहे हैं पर अभी तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला है। सीबीआई ने यूपीपीएससी की अप्रैल 2012 से मार्च 2017 तक की 598 परीक्षाओं की जांच की। 10 हजार से अधिक अभ्यर्थियों के बयान लिए और दो एफआईआर भी दर्ज की गई। कुछ लोगों को नामजद किया गया। धांधली की आशंका में कई अभ्यर्थियों और आयोग के कुछ कर्मचारियों को नोटिस जारी किया लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। जांच अब ठंडे बस्ते में है।




वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान आयोग की भर्ती परीक्षाओं में धांधली सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा था। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेश में आयोग के खिलाफ व्यापक स्तर पर आंदोलन हुआ था और भाजपा ने घोषणा की थी कि उसकी पार्टी की सरकार बनी तो सबसे पहले सीबीआई जांच कराई जाएगी। भाजपा ने वादा पूरा किया और जनवरी-2018 में भर्ती परीक्षाओं की जांच के लिए सीबीआई ने यूपीपीएससी परिसर में अपना पहला कदम रखा। हालांकि, शुरुआत में आयोग के तत्कालीन कर्मचारियों व अधिकारियों ने जांच का विरोध किया और मामला कोर्ट तक पहुंचा। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद जांच शुरू हुई।



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