मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाल्मीकि जयंती पर सोमवार को बिठूर पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री यहां वाल्मीकि आश्रम में रामायण पाठ व पूजा में शामिल होंगे और महर्षि वाल्मीकि को श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे। मान्यता है कि इसी आश्रम में महाकाव्य रामायण की रचना हुई और माता सीता को आश्रय मिला था। यहीं भगवान श्रीराम के पुत्रों लव-कुश का जन्म हुआ।

मुख्यमंत्री इस अवसर पर बिल्हौर व बिठूर के लोगो को 411 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात भी देंगे। वह विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित भी करेंगे। प्रदेश में महाकाव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की विरासत को संरक्षित करने और उनसे जुड़े पौराणिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है।

इसी क्रम में रामायण सर्किट और राम वन-गमन पथ के तहत अयोध्या, चित्रकूट व इटावा आदि में विकास कार्यों को गति दी जा रही है। पर्यटन विभाग का महर्षि वाल्मीकि से जुड़े धार्मिक स्थलों के कायाकल्प और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं जुटाने पर जोर है। इसी क्रम में 26 अक्तूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती भी प्रदेश भर में मनाई जाएगी।

पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि से जुड़े धार्मिक स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण पर जोर दिया जा रहा है। चित्रकूट इसका प्रमुख उदाहरण है। पर्यटन विभाग द्वारा चित्रकूट के लालापुर स्थित वाल्मीकि आश्रम में 19.95 लाख रुपये से 12.5 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित की जा गई है। साथ ही आश्रम के विकास पर 184.95 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि आश्रम के पास 11.20 करोड़ से पर्यटन सुविधा केंद्र का निर्माण भी लगभग पूरा हो गया है।इसके अलावा अयोध्या स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम के पर्यटन विकास के लिए 107.48 लाख और इटावा के बेला गांव स्थित प्राचीन वाल्मीकि मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 83.17 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

अयोध्या में वाल्मीकि विरासत को वैश्विक पहचान

अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि के योगदान को वैश्विक पहचान देने के लिए नवनिर्मित हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया है। शहर का वाल्मीकि भवन (रामायण भवन) भी उनकी साहित्यिक विरासत का विशिष्ट केंद्र है। इसकी दीवारों पर संस्कृत में संपूर्ण रामायण अंकित है, जो आदिकवि की रचनात्मक प्रतिभा और भारतीय संस्कृति में उनके अमूल्य योगदान को दर्शाती है।

महर्षि वाल्मीकि से जुड़े स्थल अमूल्य धरोहर

पर्यटन व संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि की विरासत भारतीय संस्कृति और रामायण परंपरा की अमूल्य धरोहर है। सरकार का उद्देश्य उनसे जुड़े स्थलों का संरक्षण, विकास और सौंदर्यीकरण कर उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। पर्यटन सुविधाओं के विस्तार से इन पावन स्थलों तक श्रद्धालुओं की पहुंच सुगम होगी। भावी पीढ़ियां आदिकवि के जीवन, साहित्य एवं आदर्शों से प्रेरणा ले सकेंगी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी अभी की खबरें