Crowd missing in the first meeting regarding the demand for Bundelkhand state

फोटो- 38 खाली पड़ी कुर्सियां। संवाद

कालपी। पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर जनसमर्थन जुटाने के लिए कालपी से शुरू की गई मुहिम की पहली बैठक में ही लोगों की बेरुखी देखने को मिली। रविवार को राम वाटिका में आयोजित सभा में महज 15 से 20 लोग ही पहुंचे। बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग को लेकर जनसमर्थन जुटाने के दावे के बीच कम उपस्थिति ने आयोजकों की कोशिशों पर सवाल खड़े कर दिए।


पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग लंबे समय से उठती रही है। पहले झांसी के शंकरलाल मेहरोत्रा ने इसकी अगुवाई की थी। बाद में यह आंदोलन राजा बुंदेला के नेतृत्व में आगे बढ़ा। शुरुआत में यह मुहिम गैरराजनीतिक थी, लेकिन चुनावी राजनीति से जुड़ाव के बाद संगठन में बिखराव भी देखने को मिला। राजा बुंदेला चुनाव के दौरान पृथक राज्य की मांग उठाते रहे हैं। कुछ माह पहले उन्होंने इस मुद्दे पर यात्रा भी निकाली थी। अब झांसी के अंकित परिहार और मुकेश राजपूत ने पृथक बुंदेलखंड राज्य के लिए जनसमर्थन जुटाने की पहल की है। इसके लिए बुंदेलखंड के प्रवेश द्वार माने जाने वाले कालपी में पहली बैठक आयोजित की गई थी। सभा में राष्ट्रीय किसान मंच के अध्यक्ष शेखर दीक्षित को मुख्य अतिथि बनाया गया, लेकिन कम उपस्थिति के चलते आयोजन अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सका।



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