लखनऊ। सआदतगंज के कटरा विजन बेग में चौपटिया रोड पर खतरनाक मांझे की चपेट में आने से नौ वर्षीय तस्किया गंभीर रूप से घायल हो गई। उसके गले में गहरा घाव हो गया। उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उसकी जान बचाई और गले में 13 टांके लगाए। बच्ची के पिता ने सआदतगंज थाने में शनिवार को एफआईआर दर्ज कराई है।

चौक के पीरबुखारा निवासी इंजीनियर सैयद सुहैल के मुताबिक, वह 20 अक्तूबर को अपनी बेटी के साथ सिब्तेनाबाद इमामबाड़े में फूफी के चालीसवें में शामिल होने गए थे। वहां से लौटते समय तस्किया बाइक पर आगे बैठी थी। रास्ते में अचानक पतंग का मांझा उनके सिर पर आ गिरा। सुहैल ने एक हाथ से मांझा हटाने की कोशिश की लेकिन वह तस्किया की गर्दन में उलझ गया। उसे छुड़ाने के प्रयास में बाइक अनियंत्रित हो गई और दोनों सड़क पर गिर पड़े। इसी दौरान मांझे से तस्किया की गर्दन कट गई और खून बहने लगा।

वह घायल बेटी को गले पर हाथ रखकर पास के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां से डॉक्टरों ने उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन कर बच्ची की जान बचाई।

सुहैल ने इस मामले में मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई है। सआदतगंज इंस्पेक्टर संतोष आर्य ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से पतंगबाज की पहचान की जा रही है।

इस साल मांझे के कारण हुईं घटनाएं

4 फरवरी : बाजारखाला इलाके में मांझे से गला कटने के कारण एमआर शोएब की मौत हो गई।

5 फरवरी : शहीद पथ पर प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आने से सेवानिवृत्त फौजी बृजेश राय के होंठ और गाल कट गए।

7 फरवरी : चौक इलाके में मांझे से चौपटिया निवासी नजम खान घायल हो गए।

13 फरवरी : आलमबाग इलाके में मांझे की चपेट में आने से ध्रुव नारायण घायल हो गए।

29 मार्च : काकोरी के दुर्गागंज इलाके में प्रतिबंधित मांझे से राज रावत घायल हो गए।

14 सितंबर : वजीरगंज इलाके में प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आने से ठाकुरगंज के जनरैलगंज निवासी राघवेंद्र कुमार द्विवेदी घायल हो गए।

सिर्फ एफआईआर दर्ज करने तक सीमित है पुलिस की कार्रवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने खतरनाक मांझे से हो रहे हादसों पर चिंता जताते हुए इसके उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक के प्रभावी निर्देश दिए थे। कोर्ट ने प्रदेशव्यापी अभियान, जनजागरूकता और स्थायी निगरानी पर जोर दिया था। अदालत ने कहा था कि खतरनाक मांझे पर रोक लगाने के लिए नियमित कार्रवाई जरूरी है। प्रदेश में 2016 से प्रतिबंध लागू होने के बावजूद घटनाएं जारी हैं। सख्ती के नाम पर पुलिस एफआईआर तो दर्ज कर रही है लेकिन अब तक किसी मामले में ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।



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