राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6: 2023-24) की रिपोर्ट के मुताबिक यूपी में महिलाओं के खिलाफ होने वाली वैवाहिक हिंसा के मामलों में कमी आई है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में हालात अब भी चिंताजनक हैं। रिपोर्ट के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान 3.7 फीसदी महिलाओं ने शारीरिक हिंसा झेली।

आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में 18 से 49 साल की महिलाओं के साथ जीवनसाथी द्वारा की जाने वाली शारीरिक या यौन हिंसा का ग्राफ घटकर 28.5% पर आ गया है। पिछले सर्वे (एनएफएचएस-5: 2019-21) में यह आंकड़ा 34.9% था। शहरों में जहां 20.7% महिलाएं हिंसा का शिकार हैं। वहीं, ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 30.7% है। साफ है कि गांवों में महिलाओं को अब भी ज्यादा प्रताड़ना झेल रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की 3.7% महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान भी शारीरिक प्रताड़ना का सामना किया। पिछले सर्वे (NFHS-5) के मुकाबले इसमें कोई सुधार नहीं हुआ है। गांवों (3.9%) में यह दर शहरों (3.1%) की तुलना में ज्यादा है। कम उम्र में यौन हिंसा की बात करें, तो 18 साल की उम्र से पहले यौन हिंसा झेलने का आंकड़ा मामूली रूप से घटकर 0.5% (पहले 0.7%) पहुंच गया है।

आर्थिक आजादी से बदलाव

हिंसा में आई इस कमी को महिलाओं की बढ़ती आर्थिक आजादी और जागरूकता से जोड़कर देखा जा रहा है। अब यूपी में 83.5% महिलाओं का बैंक खाता है। इस मामले में ग्रामीण महिलाएं (84.3%) शहरी महिलाओं (81%) से आगे हैं। मोबाइल फोन रखने वाली महिलाओं की संख्या भी 46.5% से बढ़कर 56.4% हो गई है। नकद आय हासिल करने वाली महिलाओं का प्रतिशत भी 15.5% से सुधरकर 21.1% हो गया है।

शिक्षा के चलते आई कमी

शिक्षा के प्रचार प्रसार, आत्मनिर्भरता और जागरूकता के चलते शहरों में घरेलू हिंसा में ज्यादा कमी आई है। गांवों में शिक्षा व जागरूकता का ग्राफ अब भी कम है। इसलिए गांवों में घरेलू हिंसा के मामले कम नहीं हो रहे। हालांकि, गांवों में सरकारी योजनाओं, नशा उन्मूलन और रोजगार से घरेलू हिंसा कम हुई है।– प्रो. मानिनी श्रीवास्तव, मनोविज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *