बहुजन समाज पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग में ब्राह्मणों की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। बीते दो दशकों में कई ब्राह्मण नेता बसपा की ताकत बने तो उनके कुनबे के सदस्य भी पीछे नहीं रहे। ब्रजेश पाठक, सतीश चंद्र मिश्रा, विनय शंकर तिवारी, रामवीर उपाध्याय, राकेश तिवारी के साथ उनके कुनबे के सदस्यों को भी बसपा ने राजनीति में स्थापित किया, लेकिन सतीश मिश्रा के अलावा बाकियों ने धीरे-धीरे साथ छोड़ दिया। वर्तमान में बसपा में ब्राह्मण नेताओं की कमी होने से उसका सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला खतरे में है।




इसके अलावा दद्दन मिश्रा, राजेश त्रिपाठी, शिव प्रताप मिश्रा, रामू द्विवेदी जैसे तमाम ब्राह्मण नेता भी बसपा से दूर होते गए। ब्रजेश पाठक के करीबी परिजन अरविंद त्रिपाठी उर्फ गुड्डू त्रिपाठी बसपा के एमएलसी बने थे। विनय शंकर तिवारी के कई परिजन भी बसपा सरकार में अहम पदों पर रहने के साथ विधायक बने। रामवीर उपाध्याय की पत्नी और भाई भी बसपा में शामिल होकर राजनीति में पर्दापण किया था। राकेश तिवारी के बेटे और भाई भी बसपा में रह चुके हैं। इसके अलावा तमाम ब्राह्मण नेता बसपा के टिकट पर सांसद और विधायक बने लेकिन बाद में दूसरे दलों में चले गए।



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