भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए ऑडिट पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है तो वह अपनी सरकार के कार्यकाल का ‘भर्ती और परिवारवाद ऑडिट’ जारी करें। ‘ऑडिट’ शब्द का शौक पालने वाले अखिलेश को लगता है कि इस ऑडिट से उनके शासनकाल के काले कारनामे धुल जाएंगे। वहीं अखिलेश द्वारा सत्ता में आने के 90 दिन के भीतर जातीय जनगणना कराने के बयान पर कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री को कम से कम संविधान की बुनियादी समझ होनी चाहिए।
उन्होंने बुधवार को जारी अपने बयान में आगे कहा कि राहुल और अखिलेश जनता के वास्तविक मुद्दों से कट चुके हैं। अखिलेश अपनी तथाकथित ‘आरक्षण घोटाला पुस्तक’ को हर गांव और घर तक ले जाएं ताकि वहां जाने पर पिछड़े और दलित युवा पूछेंगे कि 2012 से 17 के बीच उनके हक की नौकरियां सैफई भेजी जा रही थीं, तब यह ऑडिट कहां सोया हुआ था।
वहीं राहुल के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि पीएम मोदी का वैश्विक स्तर पर बढ़ता सम्मान कांग्रेस और सपा को पच नहीं रहा है। उनके विदेश दौरे देश के हितों को मजबूत करने, निवेश लाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए होते हैं।
राहुल गांधी हर राष्ट्रीय उपलब्धि में भी राजनीति और नकारात्मकता खोजते हैं। इटली में पीएम मोदी और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच संवाद के बारे में राहुल की टिप्पणी उनकी अपरिपक्व मानसिकता और हताशा दर्शाती है। कांग्रेस हमेशा देश की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करती रही है। राहुल गांधी द्वारा देश में आर्थिक संकट की बात करना हास्यास्पद है।
वह लगातार लोकतांत्रिक संस्थाओं, संविधान और संवैधानिक पदों पर अनर्गल आरोप लगाकर लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। जिस कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर संविधान की आत्मा को कुचलने का काम किया, आज वह संविधान की दुहाई दे रही है। ‘लेटरल एंट्री’ जैसे विषयों को लेकर भ्रम फैलाना भी विपक्ष की राजनीतिक हताशा का प्रमाण है। विपक्ष हर सुधार का विरोध केवल राजनीतिक लाभ के लिए करता है।
