आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने धाकरान इलाके में नजूल विभाग के फर्जी पत्र के सहारे पास कराए गए भवन के नक्शे को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया के दौरान तैनात रहे अधिकारियाें को भी प्राधिकरण ने चिह्नित कर जांच शुरू कर दी है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार नजूल विभाग ने अपने पत्र में दावा किया है कि उसकी ओर से सिर्फ एक ही पत्र जारी किया गया जिसमें संपत्ति के सरकारी भूमि होने का उल्लेख था। ऐसे में किसी फर्जी पत्र के आधार पर नक्शा पास किया जाना गलत है। विभाग के इस दावे के बाद प्राधिकरण को शुरुआती जांच में पता चला है कि नजूल विभाग का पत्र मिलने और आपत्ति के बावजूद एडीए अफसरों-बाबुओं के रैकेट ने नक्शे को मंजूरी दे दी।
ऐसे में उस समय तैनात रहे इंजीनियरों, बाबुओं और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को चिह्नित किया जा रहा है। एडीए सचिव संजय कुमार ने बताया कि नक्शे को निरस्त करने के साथ ही आगे की कार्रवाई के लिए भी जांच की जा रही है। अमर उजाला ने एमजी रोड पर धाकरान चौराहे के पास स्थित एक संपत्ति के लिए एक ही तारीख में दो अलग-अलग पत्रांकों से एनओसी जारी करने के मामले का खुलासा किया था। खुद को जमीन का मालिक बताने वाले ने प्राधिकरण के एबीपास पोर्टल पर 4 जनवरी 2025 की तारीख वाली एनओसी अपलोड कर मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन किया था।
उस समय तहसीलदार सदर और नजूल मुहर्रिर की आख्या के आधार पर दावा किया गया कि भूमि नजूल की नहीं है, जिसके आधार पर एडीए ने नक्शा मंजूर कर दिया था। बाद में नजूल विभाग द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट हुआ कि सर्वे शीट नंबर-107 मौजा-चक अव्वल शहर आगरा (सन 1929-30) के अनुसार यह जमीन नजूल भूखंड के अंतर्गत आती है और इसके लिए एनओसी दिया जाना संभव ही नहीं है। इसी के बाद से नजूल विभाग और प्राधिकरण मामले की जांच में जुटा है।
दर्ज होगी प्राथमिकी
गुड़ की मंडी में धोखाधड़ी कर नक्शा पास कराने और सरकारी जमीन पर निर्माण के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद अब धाकरान की जमीन के मामले में भी प्राधिकरण ने कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। सूत्रों का कहना है कि विभाग के अफसर जांच पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। इस बार नक्शा पास कराने वाले बिल्डर के अलावा मिलीभगत में शामिल रहे विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी की तैयारी चल रही है।
