झांसी। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत ऋण लेकर कारोबार करने वाले जिले के 85.92 फीसदी छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले यूपीआई से लेनदेन कर रहे हैं। डिजिटल लेनदेन में सक्रिय वेंडर्स के प्रतिशत के मामले में प्रदेश के 17 नगर निगमों में झांसी दूसरे स्थान पर है। वाराणसी 92.11 फीसदी के साथ पहले स्थान पर है।

पीएम स्वनिधि योजना के तहत झांसी में जून 2020 से जून 2026 तक 37,672 छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को ऋण वितरित किया गया। इनमें से 32,366 वेंडर्स यूपीआई के माध्यम से लेनदेन कर रहे हैं। इस तरह अभी 5,306 वेंडर्स को डिजिटल लेनदेन से जोड़ने की चुनौती है।

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, डिजिटल लेनदेन में निष्क्रिय वेंडर्स की यूपीआई आईडी सक्रिय कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जुलाई 2026 में 961, अगस्त में 610 और सितंबर में 600 वेंडर्स की यूपीआई आईडी सक्रिय कराई गईं। इस तरह तीन महीनों में कुल 2,171 वेंडर्स की यूपीआई आईडी सक्रिय हुईं।

योजना के तहत छोटे दुकानदारों को ऋण उपलब्ध कराने के साथ डिजिटल भुगतान के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे दुकानदारों को ग्राहकों से ऑनलाइन भुगतान प्राप्त करने और लेनदेन का रिकॉर्ड रखने में सुविधा मिलती है।

डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने पर जोर

पीएम स्वनिधि योजना का उद्देश्य रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उनके कारोबार को मजबूत करना है। योजना के तहत पात्र वेंडर्स को चरणबद्ध तरीके से ऋण दिया जाता है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना भी योजना का अहम हिस्सा है।

ये हैं 17 नगर निगमों की स्थिति

नगर निगम यूपीआई लेनदेन करने वाले वेंडर्स

वाराणसी

92.11 फीसदी

झांसी

85.92 फीसदी

प्रयागराज

84.15 फीसदी

मुरादाबाद

82.62 फीसदी

लखनऊ

79.34 फीसदी

बरेली

78.96 फीसदी

मथुरा

78.90 फीसदी

फिरोजाबाद

78.84 फीसदी

सहारनपुर

78.70 फीसदी

मेरठ

78.05 फीसदी

अलीगढ़

76.20 फीसदी

गाजियाबाद

74.76 फीसदी

गोरखपुर

74.61 फीसदी

अयोध्या

72.50 फीसदी

शाहजहांपुर

69.98 फीसदी

कानपुर नगर

69.92 फीसदी

आगरा

68.10 फीसदी

नोट: आंकड़े स्ट्रीट वेंडर्स के यूपीआई लेनदेन से संबंधित हैं।

वर्जन

पीएम स्वनिधि योजना के तहत वितरित ऋण के सापेक्ष यूपीआई से लेनदेन करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स के प्रतिशत में झांसी प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। निष्क्रिय वेंडर्स की यूपीआई आईडी सक्रिय कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। – रोली गुप्ता, परियोजना अधिकारी, डूडा



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