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यूपी में सरकारी नौकरी के नियम।
– फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
नियुक्ति विभाग ने उत्तर प्रदेश में सरकारी नियुक्तियों के लिए अभ्यर्थियों के चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन से संबंधित शासनादेश को लेकर कुछ समाचार माध्यमों में प्रकाशित रिपोर्ट पर स्थिति स्पष्ट की है। विभाग के अनुसार, शासनादेश की व्याख्या करते समय इसके मूल आशय और वास्तविक प्रावधानों को समझना जरूरी है। संबंधित नियम स्पष्ट करता है कि किसी व्यक्ति को केवल उसकी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर सरकारी नियुक्ति के लिए अनुपयुक्त नहीं माना जाएगा। इसलिए इस प्रावधान को राजनीतिक विचारधारा, वैचारिक असहमति या शांतिपूर्ण विरोध के आधार पर सरकारी नौकरी से वंचित करने की व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
प्रावधान में राजनीतिक विचारधारा और हिंसात्मक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर किया गया है। इसमें विशेष रूप से ऐसे संगठनों का उल्लेख है, जिनका संकल्पित उद्देश्य हिंसात्मक तरीके से समाज की विद्यमान व्यवस्था को बदलना है। ऐसे संगठनों से जुड़ाव और संबंधित गतिविधियों के मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा। इसका आशय सामान्य राजनीतिक विचारों, सरकार की आलोचना या शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक गतिविधियों को हिंसात्मक गतिविधियों के समान मानना नहीं है।

