आगरा में साइबर ठगों ने 80 वर्षीय वृद्ध को डिजिटल अरेस्ट कर ऐसा खौफजदा किया कि वह अपनी जीवनभर की पूंजी देने को तैयार हो गए। कांपते पैर, चेहरे पर खौफ लिए बैंक पहुंचे बुजुर्ग ने जब एक साथ 81 लाख रुपये एक खाते में भेजने के लिए कहा तो अधिकारियों का माथा ठनक गया। बैंककर्मियों ने जब परिजन से संपर्क किया तो पता चला कि बुजुर्ग डिजिटल अरेस्ट हो गए थे। बैंक की सतर्कता से बड़ी धोखाधड़ी टल गई।

मामला आवास विकास सेक्टर-10 स्थित केनरा बैंक की शाखा का है। मैनेजर रवि कुमार ने बताया कि मंगलवार दोपहर करीब एक बजे एक आवास विकास कॉलोनी निवासी बुजुर्ग बैंक पहुंचे और 81 लाख रुपये के आरटीजीएस का अनुरोध किया। पूछने पर बताया कि बेटे के लिए संपत्ति खरीदनी है।

जब मैनेजर ने बेटे का नंबर और लाभार्थी की जानकारी मांगी तो टालमटोल करने लगे। खाते की जांच में पता चला कि एक दिन पहले ही सारी एफडी तुड़वाई गई हैं। संदेह होने पर मैनेजर ने लेनदेन रोककर एक महिला अधिकारी को बुजुर्ग के घर भेजा लेकिन वहां सही जानकारी नहीं मिल सकी।

बुजुर्ग बैंक में जिद पर अड़ गए कि मेरा पैसा है, मैं जिसे चाहूं भेजूं। इसके बावजूद बैंककर्मियों ने धैर्य नहीं खोया। काफी मशक्कत के बाद बुजुर्ग की अधिवक्ता बहू से संपर्क साधा। बहू के बैंक पहुंचने पर चौंकाने वाला सच सामने आया।

उन्होंने बताया कि वह डिजिटल अरेस्ट के शिकार थे और खौफ में अपनी सारी कमाई ठगों को ट्रांसफर कर रहे थे। बहू ने बैंक अधिकारियों का आभार जताते हुए कहा कि आपकी सतर्कता ने मेरे ससुर की जीवनभर की जमापूंजी बचा ली। उन्होंने साइबर थाने में शिकायत की भी बात कही।

बुजुर्ग की घबराहट देखकर संदेह हुआ। जब जांच पड़ताल की गई तो उनके डिजिटल अरेस्ट होने का पता चला। सतर्कता से उनकी गाढ़ी कमाई बच गई। – रवि कुमार, मैनेजर, केनरा बैंक

साइबर क्राइम डीसीपी आदित्य सिंह ने बताया कि पुलिस कभी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। अगर कॉल कर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, बैंक अधिकारी बताकर मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दे तो समझ जाएं कि साइबर ठग है। ऐसे लोगों की कॉल काट दें। साथ ही हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। 



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