सिकंदरा में होली पब्लिक स्कूल के सामने 500 साल पुरानी लोदी काल की पहली मस्जिद का नामोनिशान मिटने के कगार पर है। इसे 25 साल पहले सहेजने के प्रयास किए गए थे, लेकिन परवान नहीं चढ़ सके। अब तीन में से दो गुंबद गिरने के बाद पर्यटन से जुड़े लोगों ने इसे बचाने की मांग की है।

साल 2001-02 में एएसआई के तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद केके मुहम्मद ने इसकी मरम्मत के लिए अडॉप्ट हेरिटेज स्कीम में रखा था। उनके तबादले के बाद इसका संरक्षण ही नहीं किया गया। तब यहां तत्कालीन संरक्षण सहायक डॉ. आरके दीक्षित ने निरीक्षण कर इस धरोहर को बचाने के लिए काम का ब्योरा भी दिया था। आईटीसी होटल ग्रुप ने इसके संरक्षण के लगे रुचि दिखाई थी।

वर्ष 2010 में हो चुका विवाद

इस मस्जिद में साल 2010 में तीन दिन तक नमाज पढ़ने के नाम पर विवाद हुआ था। तत्कालीन सांसद के नेतृत्व में विरोध किया गया। इस पर यहां नमाज अदा करने से लोगों को रोक दिया गया। आगरा अप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन अध्यक्ष शमशुद्दीन के मुताबिक लोदी काल की मस्जिद को बचाने की जरूरत है। 500 साल पुराने आगरा के इतिहास, लोदी काल की वास्तुकला समझने के लिए उसका संरक्षण होना ही चाहिए।

टूरिज्म गिल्ड के पूर्व अध्यक्ष राजीव सक्सेना के मुताबिक पुरातत्व के लिए काम कर रहे एनजीओ को आगे आकर इसे बचाना चाहिए। केवल ताज और यूनेस्को धरोहरों के लिए एनजीओ योजना लाते हैं, असलियत में ऐसी धरोहर बचाने की कोशिश की जाए। गाइड एसोसिएशन के ही ताहिरउद्दीन ताहिर ने कहा कि इसे धार्मिक नजरिये से देखने की जगह सांस्कृतिक और पुरातत्व धरोहर मानते हुए बचाया जाए।

 



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