मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजस्व मामलों का सही निपटारा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। भूमि और राजस्व से जुड़े विवाद सामाजिक सौहार्द से सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए इन मामलों में देरी स्वीकार्य नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्धारित समय-सीमा के बाद भी लंबित रहने वाले मामलों में संबंधित अधिकारियों और कार्मिकों की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने शनिवार को राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व न्यायालयों की कार्यक्षमता को और अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि आम नागरिक को शीघ्र न्याय मिल सके। निर्धारित समय सीमा से अधिक लंबित मुकदमों का अभियान चलाकर निस्तारण किया जाए।

सीएम ने कहा कि तहसील और जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा हो और कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों की जवाबदेही तय की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि आम लोगों को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए।

भू उपयोग परिवर्तन में अमेठी समेत कई जिले पीछे

बैठक में बताया गया कि आरसीसीएमएस पोर्टल के माध्यम से धारा-80 (भू-उपयोग परिवर्तन) के अंतर्गत लंबित वादों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। 1 जनवरी को कुल 85158 वाद लंबित थे, जिनमें से 77578 का निस्तारण किया गया था। वहीं 22 मई तक कुल लंबित वादों की संख्या घटकर 38166 रह गई, जिनमें 29543 वादों का निस्तारण किया गया। धारा-80 के मामलों में बस्ती, चित्रकूट, अयोध्या, बागपत और कन्नौज ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि मेरठ, वाराणसी, अमेठी, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर पाया गया।

दाखिल खारिज में रामपुर-मुरादाबाद का प्रदर्शन कमजोर

बैठक में बताया गया कि धारा-34 (दाखिल खारिज) के अंतर्गत लंबित वादों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। 1 जनवरी 2026 को कुल 2244466 वाद लंबित थे, जो 22 मई तक घटकर 1059139 रह गए। इस अवधि में 540945 वादों का निस्तारण किया गया। समीक्षा में बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़ और बदायूं का प्रदर्शन बेहतर पाया गया, जबकि गोरखपुर, संतकबीरनगर, प्रतापगढ़, बलिया और देवरिया अपेक्षित प्रगति नहीं कर सके।

पैमाइश में लखनऊ-अमेठी, कुर्रा बंटवारे में प्रतापगढ़-गोंडा पीछे

धारा-33 के अंतर्गत निर्विवादित वरासत के मामलों में 2025 में कुल 1689732 आवेदन मिले थे, जिनमें से 1643104 का निस्तारण किया गया। वहीं 22 मई तक प्राप्त 715872 आवेदनों में से 652512 का निस्तारण किया जा चुका है। धारा-24 (पैमाइश) के मामलों में गौतमबुद्धनगर, लखनऊ, प्रतापगढ़, अमेठी और मुजफ्फरनगर अपेक्षित प्रगति नहीं कर सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन जिलों में प्रगति संतोषजनक नहीं है, वहां वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। धारा-116 (कुर्रा बंटवारा) में वाराणसी, एटा, आजमगढ़, लखीमपुर खीरी और महाराजगंज का प्रदर्शन बेहतर रहा, जबकि प्रतापगढ़, मुजफ्फरनगर, कानपुर नगर, गोंडा और बलिया का प्रदर्शन कमजोर पाया गया।

 



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