यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘अपनों के घेरे में माननीय’ की कहानी। इसके अलावा ‘जंग में फंसी गर्दन’ और ‘चर्चा में गुरु जी के बॉक्सर’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…

अपनों के घेरे में माननीय

विभाग में कटिंग के बाद माननीय की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पता चला है कि माननीय को उनके ‘घर’ में घेरने के लिए उनके ‘अपनों’ ने ही कमर कस ली है। ‘सिटिंग’ का पत्ता काटकर टिकट लेने के बाद शांत बैठे विरोधी अचानक हमलावर हो गए हैं। पार्टी में ही नाकेबंदी हो गई है। माननीय का कच्चा चिट्ठा केवल तैयार ही नहीं किया जा रहा बल्कि लगातार अपडेट किया जा रहा है और ‘उचित जगह’ भेजा जा रहा है। खबर तो ये भी है कि माननीय के एक निकट सहयोगी भी पलटी मार गए हैं। आगे आगे देखिए होता है क्या…।

जंग में फंसी गर्दन

डॉक्टरों के अधिकारों को लेकर जंग लड़ने का दंभ भरने वाले बुरे फंस गया है। उन्होंने सरकार से दो- दो हाथ करने के लिए बांह बटोरी। आंदोलन का ऐलान कर दिया, लेकिन बाद में पता चला कि उनकी तरह से ही ढेरों कमियां हैं। नियम कायदे को उन्होंने ही ताक पर रख दिया था, जिनके लिए संघर्ष का दंभ भरा जा रहा है। फिर क्या था। बैकफुट पर जाने के अलावा कोई चारा नहीं है। ऐसे में अब तय किया गया है कि आगे जंग का ऐलान करने से पहले नियम कायदे को परखा जाएगा।

चर्चा में गुरु जी के बॉक्सर

प्रदेश के एक पुराने व प्रमुख विश्वविद्यालय आजकल अपने कामकाज से ज्यादा गुरु जी लोगों की वजह से चर्चा में है। कभी किसी कारण तो कभी किसी कारण। हाल में एक गुरु जी अपने बॉक्सरों को लेकर खासे चर्चा में हैं। बताय जा रहा है कि गुरु जी ने खुद को खतरा बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से ही कुछ गार्ड एलॉट करा लिए हैं तो बॉक्सर की तरह उनके आगे-पीछे चलते हैं। इसकी वजह से गुरु जी का पारा भी आजकल चढ़ा हुआ रहता है। ऐसे में अब शिक्षक उनसे कटने लगे हैं। फिलहाल गुरु जी और उनके बॉक्सर परिसर में चर्चा का विषय बने हुए हैं।



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