eulogies for one who gave us opportunity stories of bureaucrats busy with letters and endless waiting

सुना है क्या/suna hai kya
– फोटो : अमर उजाला

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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘मौका देने वाले की पहले वंदना’ की कहानी। इसके अलावा ‘चिट्ठी-चिट्ठी में व्यस्त नौकरशाह’ और ‘नहीं कट रहे इंतजार के दिन’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…


मौका देने वाले की पहले वंदना

खाकी से जुड़े एक शैक्षणिक संस्थान में बीते दिनों एक कार्यक्रम की तस्वीर ने लोगों को हतप्रभ कर दिया। कार्यक्रम में मंच पर अफसरों को जगह देने में उनकी वरिष्ठता ताक में रख दी गई। वहां नियम कायदों के जानकार अनुभवी लोगों की कमी नहीं थी फिर भी किसी ने टोकने की जहमत नहीं की। होना तो ये चाहिए था कि जूनियर को खुद इस गलती को सुधार कर वरिष्ठ को अपनी जगह देनी चाहिए थी लेकिन हाईकमान से नजदीकी का मौका भला कौन चूकता है। वैसे भी उनके ग्रहदशा ठीक नहीं चल रहे हैं। वहीं आयोजकों का यह करना स्वाभाविक था। जिसने दोबारा मौका दिया है, उनकी वंदना तो जरूरी है।

चिट्ठी-चिट्ठी में व्यस्त नौकरशाह

एक नौकरशाह विद्यार्थियों के मामले में भी चिट्ठी-चिट्ठी खेलने में व्यस्त हैं। किस मद से धनराशि दी जानी है, यह शासनादेश में एकदम स्पष्ट है, फिर भी उन्होंने चिट्ठी चला दी कि विद्यार्थियों को किस मद से धनराशि दी जाए। जिस महकमे को यह चिट्ठी लिखी गई, उसके अफसर भी सिर पकड़कर बैठ गए। खैर, जवाब तो इन नौकरशाह को भिजवा दिया गया है। लेकिन, अफसर सकते हैं कि कहीं ऊपर की पड़ताल में देरी के लिए उन्हें न जिम्मेदार ठहरा दिया जाए। अब कौन बताए कि नौकरशाह ने भी तो इसी कारण से चिट्ठी लिखकर अपना बचाव करने का इंतजाम कर लिया है।

नहीं कट रहे इंतजार के दिन

प्रदेश के एक कमिश्नरेट में मुखिया लंबे समय से तैनात हैं। उतने ही समय से तमाम अधिकारी उनके जाने का इंतजार कर रहे हैं। कुछ परेशान हैं इसलिए वह मुक्ति पाने जैसा इसको देख रहे हैं तो दो ऐसे बड़े साहब हैं जो कमिश्नरेट में आंखें गड़ाए हुए हैं। वह वहां पर जाने के लिए बेहद आतुर हैं। जब से चुनाव आयोग ने तबादले संबंधी निर्देश जारी किए गए हैं तब से बेचैनी और बढ़ गई है। वह उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द सूची आ सकती है और उनके दिन भी बहुर सकते हैं। खैर ये वक्त बताएगा कि कम वहां के अधिकारियों को राहत मिलेगी और वह कौन होगा जिसको वहां की कमान दी जाएगी।



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