{“_id”:”6aef38eb91104b034b048928″,”slug”:”government-teachers-cannot-refuse-election-duty-by-citing-their-studies-petition-by-five-teachers-dismissed-2026-11-07″,”type”:”story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”हाईकोर्ट : पढ़ाई को ढाल बना चुनाव ड्यूटी से इन्कार नहीं कर सकते सरकारी शिक्षक, पांच टीचरों की याचिका खारिज”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और राज्य”,”slug”:”city-and-states”}}

इलाहाबाद हाईकोर्ट।
– फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी शिक्षकों की चुनाव संबंधी ड्यूटी को वैध ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों का मूल दायित्व बच्चों को पढ़ाना है, लेकिन संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत उन्हें निर्वाचन संबंधी कार्यों में भी लगाया जा सकता है। इसलिए वे शिक्षण कार्य का हवाला देकर चुनाव ड्यूटी से इन्कार नहीं कर सकते।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने सहारनपुर के जूनियर और सीनियर बेसिक स्कूलों में कार्यरत अजरा परवीन समेत पांच सहायक अध्यापकों की याचिका खारिज करते हुए की। याचियों ने उन्हें मतदाता सूची से जुड़े कार्यों से मुक्त करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि शिक्षकों की सेवा शर्तों में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) का कार्य करने का कोई प्रावधान नहीं है।
याचियों ने दलील दी कि इस तरह की तैनाती से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। यह संविधान के अनुच्छेद 21-ए और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के भी विपरीत है। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने कहा कि सरकारी शिक्षकों को बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) के रूप में तैनात किया जा सकता है। उनकी जिम्मेदारी में मतदाता सूची तैयार करना, उसमें संशोधन और सुधार करना तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे कार्य शामिल हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 27 के तहत शिक्षकों को चुनाव संबंधी कार्यों में लगाया जा सकता है। बीएलओ की जिम्मेदारी भी इसी अपवाद के दायरे में आती है। मतदाता सूची तैयार करना और उसमें संशोधन करना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत वैधानिक कार्य है।

