इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि सरकारी कर्मचारी के आधिकारिक कर्तव्य के दौरान किए गए कथित अपराध की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने से पहले मजिस्ट्रेट को संबंधित कर्मचारी का पक्ष सुनना अनिवार्य है। न्यायालय ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(4) के तहत सरकारी कर्मचारियों को मिली सुरक्षा का पालन किए बिना एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दिया जा सकता।
यह टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम द्वारा 12 अगस्त 2026 को पारित आदेश को रद्द कर दिया। न्यायालय ने सरकारी चिकित्सक डॉ. राहुल वर्मा की याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ शुरू की गई संबंधित कार्यवाही भी निरस्त कर दी।
क्या है पूरा मामला
मामला गौतमबुद्ध नगर स्थित यथार्थ अस्पताल में हुई एक सर्जरी से जुड़ा है। धीरेंद्र ने शिकायत में आरोप लगाया था कि 31 मई 2025 को उसकी पत्नी की अस्पताल में पित्ताशय की पथरी निकालने की शल्यक्रिया हुई थी। आरोप था कि शल्यक्रिया के दौरान 10 मिलीमीटर की पथरी रह गई, जिसके कारण उसकी पत्नी को लगातार दर्द होता रहा। बाद में दूसरे अस्पताल में पथरी निकाली गई। शिकायतकर्ता ने इसे चिकित्सकीय लापरवाही बताया था।
शिकायत के बाद गौतमबुद्ध नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने 11 जुलाई 2025 को अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शुभ्रा मित्तल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की। डॉ. राहुल वर्मा भी इस समिति के सदस्य थे। समिति ने संबंधित पक्षों को सुनने के बाद उपलब्ध तथ्यों और रिपोर्टों पर विचार किया और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।शिकायतकर्ता समिति की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ और उसने जिलाधिकारी के समक्ष दोबारा शिकायत की।
