मोंठ। हादसों में गंभीर रूप से घायल मरीजों को तत्काल इलाज देने के लिए बनाया गया मोंठ का ट्रामा सेंटर खुद ही संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। यहां न अल्ट्रासाउंड की सुविधा है और न ही रोजाना एक्स-रे की व्यवस्था। हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती के बावजूद सिर में गंभीर चोट वाले मरीजों के लिए न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरो सर्जन उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है।
झांसी-कानपुर हाईवे पर होने वाले हादसों में घायलों को त्वरित उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मोंठ सीएचसी परिसर में वर्ष 2016 में 1.87 करोड़ रुपये की लागत से ट्रामा सेंटर बनाया गया था। हाईवे से करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह केंद्र आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद जरूरी संसाधनों और स्टाफ की कमी के कारण इसका उद्देश्य पूरी तरह पूरा नहीं हो पा रहा है।
एक्स-रे भी तीन दिन, अल्ट्रासाउंड का इंतजार
ट्रामा सेंटर में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है। एक्स-रे टेक्नीशियन की तैनाती होने के बावजूद वह सप्ताह में तीन दिन चिरगांव सीएचसी में सेवाएं देते हैं। इसके चलते मोंठ में सप्ताह में केवल तीन दिन ही एक्स-रे हो पाता है। हादसे में घायल मरीजों के लिए चोट की गंभीरता का पता लगाने में एक्स-रे अहम जांच है, लेकिन इसकी सीमित उपलब्धता उपचार में बाधा बन रही है।
सिर की चोट वाले मरीजों के लिए विशेषज्ञ नहीं
ट्रामा सेंटर में हड्डी रोग विशेषज्ञ तैनात हैं, लेकिन गंभीर सड़क हादसों में कई बार मरीजों को न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरो सर्जन की जरूरत होती है। दोनों विशेषज्ञ यहां उपलब्ध नहीं हैं। सिर में गंभीर चोट वाले मरीजों को तत्काल विशेषज्ञ उपचार की जरूरत पड़ती है। ऐसे मामलों में उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ता है।
600-700 मरीज रोज, महिला चिकित्सक नहीं
मोंठ सीएचसी में आसपास के दर्जनों गांवों से रोजाना करीब 600 से 700 मरीज पहुंचते हैं। इनमें महिलाओं की संख्या भी काफी रहती है, लेकिन यहां महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए यह परेशानी का कारण बन रहा है।
पैथोलॉजी में भी जांचों का दायरा सीमित
सीएचसी की पैथोलॉजी में एचबीए1सी, कैल्शियम और आयरन की जांच नहीं हो रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार इन जांचों के लिए जरूरी रीजेंट उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को जरूरी जांच के लिए निजी पैथोलॉजी या अन्य केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है। मधुमेह के मरीजों के लिए एचबीए1सी जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।
10 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और वार्ड बॉय की कमी
अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और वार्ड बॉय की भी कमी है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार करीब 10 कर्मचारियों की कमी है। ट्रामा सेंटर में आने वाले मरीजों की संख्या और गंभीर मामलों को देखते हुए पर्याप्त सहायक स्टाफ जरूरी है। कर्मचारियों की कमी का असर अस्पताल की दैनिक व्यवस्थाओं पर भी पड़ रहा है। संवाद
अल्ट्रासाउंड की बड़ी मशीन और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। सोलर प्लांट लगवाने के लिए भी पत्राचार किया गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी व्यवस्थाओं में सुधार के लिए संपर्क किया गया है। आवश्यक संसाधन और कर्मचारी उपलब्ध होने के बाद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। – डॉ. माताप्रसाद राजपूत, सीएचसी अधीक्षक
