झांसी। लक्ष्मी ताल के किनारे स्थित महारानी लक्ष्मीबाई की कुल देवी लक्ष्मी मंदिर को संवारने पर पुरातत्व विभाग 1.38 करोड़ रुपये खर्च करेगा। करीब दो साल पहले बिजली गिर जाने से मंदिर का एक हिस्सा नष्ट हो गया था। अब इस हिस्से के पुनर्निर्माण की योजना है। पहली किस्त के तौर पर 68 लाख रुपये खर्च होंगे। इस रकम से क्षतिग्रस्त दीवार, रासायनिक उपचार, ईंट, चिनाई एवं क्रैक्स स्टिचिंग जैसे कार्य कराए जाएंगे। नगर निगम भी यहां लैंड स्केपिंग समेत अन्य कार्य कराएगा। यह कार्य तीन माह में पूरा होना है।
इस ऐतिहासिक मंदिर को 18वीं शताब्दी में मराठा सूबेदार शिवराव भाऊ ने बनवाया था। कुल देवी के नाते महारानी लक्ष्मीबाई यहां नियमित पूजन के लिए आती थीं। यह मंदिर अपने स्थापत्य, सांस्कृतिक महत्व और दिवाली उत्सव के लिए भी जाना जाता है। उप्र सरकार ने 28 फरवरी 1968 को इसे पुरातत्व विभाग को सौंप दिया था। विभाग इसे संरक्षित करता है। मंदिर का स्थापत्य अपने आप में अद्भुत है। देखरेख न होने से दीवार में जगह-जगह पेड़ उग आए हैं। कई स्थानों पर लखौरी ईंट उखड़ गई। दीवार से प्लास्टर भी गिर गए। दो साल पहले बिजली गिरने से भी इसे काफी नुकसान हुआ। यह खस्ताहाल होता जा रहा है। यह बात निदेशक रेनू द्विवेदी तक जा पहुंची। इसके बाद जीर्णोद्धार की कवायद शुरू हुई। पुरातत्व विभाग ने वैज्ञानिक तरीके से जीर्णोद्धार का प्रस्ताव बनाया। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लाइम कंक्रीट एवं ब्रिक ऑन फ्लोरिंग जैसे कार्य भी कराए जाएंगे।
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नगर निगम कराएगा यह काम
नगर निगम की ओर से यहां लैंड स्केपिंग समेत सोलर लाइट, बैठने के लिए सुंदर पत्थर की बेंच लगाई जाएगी। इस पूरे इलाके को पिकनिक स्पॉट के तौर पर विकसित किया जाएगा। सेल्फी प्वाइंट भी बनाया जाएगा।
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पहली किस्त के तौर पर धन स्वीकृत हो गया है। इसकी मदद से यहां काम भी कराया जा रहा है। नगर निगम की मदद से इस पूरे स्थल का सुंदरीकरण भी कराया जाएगा।
डा. राजीव कुमार त्रिवेदी
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी
