आगरा। उपभोक्ता आयोग ने बैंकिंग लापरवाही और सेवा में कमी का कड़ा संदेश देते हुए इंडियन बैंक के कामकाज पर नाराजगी जताई है। बैंक की ओर से पीपीएफ खाताधारक के 4,79,903.92 रुपये बिना किसी पूर्व सूचना के रोक लेने का मामला है।
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आगरा। उपभोक्ता आयोग ने बैंकिंग लापरवाही और सेवा में कमी का कड़ा संदेश देते हुए इंडियन बैंक के कामकाज पर नाराजगी जताई है। बैंक की ओर से पीपीएफ खाताधारक के 4,79,903.92 रुपये बिना किसी पूर्व सूचना के रोक लेने का मामला है।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव कुमार की पीठ ने बैंक को यह पूरी राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ ग्राहक को लौटाने का आदेश दिया है। मामले के अनुसार, चर्च रोड निवासी संजीव सुराना संस (एचयूएफ) ने वर्ष 2000 में इंडियन बैंक की छिली ईंट शाखा में पीपीएफ खाता खोला था। उन्होंने बताया कि वह लगातार पैसे जमा करते रहे और बैंक उस पर ब्याज भी देता रहा। 16 अप्रैल, 2022 को बैंक के ही सुझाव पर जब यह खाता बंद कर बचत खाते में राशि ट्रांसफर की गई तो कुल 14.25 लाख रुपये में से बैंक ने 4.79 लाख रुपये रोक लिए।
बैंक का तर्क था कि आरबीआई के दिशा-निर्देशों के तहत 15 वर्ष की अवधि के बाद इस पर ब्याज देय नहीं था। हालांकि, आयोग ने बैंक के इस तर्क को खारिज कर दिया। बैंक इस बात का कोई भी साक्ष्य या दस्तावेज पेश नहीं कर सका कि खाता बंद करने या राशि काटने से पहले ग्राहक को नियमों की कोई जानकारी दी गई। इसके विपरीत, बैंक ने बिना किसी नए फॉर्म या औपचारिकता के वर्षों तक रकम स्वीकार की और ब्याज भी जारी रखा। आयोग ने इसे स्पष्ट रूप से सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना।