Rules at the ghats in Bateshwar idols immersed in Yamuna

बटेश्वर मे यमुना घाट पर नौका मे रख कर देवी प्रतिमा को विसर्जन को यमुना बीच धार मे ले जाते देवी

बटेश्वर। गंगा-यमुना में मूर्तियों के विसर्जन पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। प्रशासन ने अमल के लिए कुंड खुदवाए थे। दो दिनों तक पुलिस को पहरा भी रहा। बुधवार को निगरानी हटी तो बटेश्वर के घाटों पर नाचते-गाते पहुंचे श्रद्धालु जयकारों के बीच मूर्तियों को नदी में प्रवाहित करने लगे। सुबह से लेकर शाम 6 बजे तक यह क्रम चलता रहा। इन्हें रोकना वाला घाट पर कोई नहीं नजर आया।


बटेश्वर तीर्थ के नए घाट और चिंताहरण महादेव घाट पर दिनभर मूर्तियों का विसर्जन होता रहा। कई भक्तों ने नाव और मोटरबोट से बीच धारा में जाकर मूर्तियों को विसर्जित किया। इससे पहले विधि-विधान से माता रानी की अंतिम पूजा-अर्चना और आरती की गई। इस दौरान भक्तों ने जमकर अबीर-गुलाल उड़ाया और देवी के भजनों पर नाचते-झूमते नजर आए। बता दें कि वर्ष 2013 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंगा, यमुना में मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाई थी, ताकि नदियों को प्रदूषण से बचाया जा सके।

जयकारों के बीच माता रानी को दी विदाई

इरादतनगर। कस्बे में माता रानी की विदाई धूमधाम और भक्तिमय माहौल में की गई। शिव मंदिर पर विराजमान माता रानी की प्रतिमा को पूरे कस्बे में शोभायात्रा के रूप में भ्रमण कराया गया। इस दौरान श्रद्धालु मां के भजनों और भेंटों पर नाचते-गाते नजर आए। बच्चों, युवतियों, महिलाओं और युवकों में खासा उत्साह दिखाई दिया। शोभायात्रा के दौरान जगह-जगह गुलाल उड़ाया गया और फूलों की वर्षा कर माता रानी को विदाई दी गई। इसके बाद राजस्थान सीमा पर स्थित पार्वती नदी में विसर्जन किया गया। इस दौरान मदन लाल, सुधीर कुमार, रजनेश गुप्ता, गोपाल, अशोक कुमार, रोहित, मनोज, आशीष, प्रतीक, आशु, रजत, मुनमुन आदि मौजूद रहे। संवाद



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